दतिया उपचुनाव में भाजपा ने पूर्व गृह मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा की जगह आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि हाल ही में जनता से माफी मांगकर राजनीतिक वापसी की कोशिश करने वाले नरोत्तम मिश्रा को पार्टी ने टिकट क्यों नहीं दिया।
दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए भाजपा ने आशुतोष तिवारी के नाम पर मुहर लगाकर कई राजनीतिक संदेश एक साथ दिए हैं। शिवराज सरकार में सबसे प्रभावशाली मंत्रियों में शामिल रहे डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटना प्रदेश भाजपा की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। खास बात यह है कि मिश्रा ने उपचुनाव के लिए नामांकन पत्र भी खरीदा था और इससे पहले उन्हें राज्यसभा भेजे जाने की भी चर्चाएं चली थीं। इसके बावजूद पार्टी ने नए चेहरे पर भरोसा जताया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा केवल दतिया ही नहीं, बल्कि कई क्षेत्रों में पुराने चेहरों की जगह नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में आशुतोष तिवारी को मौका देना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे पार्टी लंबे समय से एक ही चेहरे पर निर्भर रहने की बजाय नए नेतृत्व को स्थापित करने का संदेश देना चाहती है।
पुराने चेहरे की जगह नए नेतृत्व को मौका
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा दतिया में लंबे समय से एक ही चेहरे पर निर्भर रहने की रणनीति बदलना चाहती है। नरोत्तम मिश्रा 2008, 2013 और 2018 में लगातार चुनाव जीतकर मंत्री बने, लेकिन 2023 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के राजेंद्र भारती से हार गए। माना जा रहा है कि इस हार के बाद पार्टी ने स्थानीय नेतृत्व और चुनावी रणनीति की नए सिरे से समीक्षा की। जानकारों का कहना है कि भाजपा अब पुराने चेहरों की जगह नई पीढ़ी के नेताओं को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। दतिया में पार्टी एक ही चेहरे के भरोसे रहने के बजाए नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने पर काम कर रही है।
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