पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। ईरान ने दावा किया है कि उसकी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने जॉर्डन के अजराक स्थित मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस पर 10 मिसाइलें दागीं। ईरानी सरकारी मीडिया का कहना है कि इस हमले में अमेरिका से जुड़े इस अहम सैन्य ठिकाने को भारी नुकसान पहुंचा है। हालांकि, जॉर्डन ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने सभी मिसाइलों को हवा में ही इंटरसेप्ट कर दिया।


ईरान ने क्या दावा किया?
ईरानी सरकारी मीडिया आईआरआईबी और अन्य स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक, आईआरजीसी ने अमेरिकी सैन्य मौजूदगी को निशाना बनाते हुए जॉर्डन के मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस पर 10 मिसाइलें दागीं। ईरान का दावा है कि हमले में एयर बेस को गंभीर नुकसान पहुंचा।
जॉर्डन का जवाब
जॉर्डन सरकार ने कहा कि मिसाइल हमले के दौरान पूरे इलाके में अलर्ट सायरन बजाए गए, लेकिन देश की एयर डिफेंस प्रणाली ने सभी मिसाइलों को रास्ते में ही मार गिराया। सरकार के अनुसार, एयर बेस को नुकसान पहुंचने की पुष्टि नहीं हुई है और सेना पूरी तरह सतर्क है।
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ताजा घटनाक्रम की बड़ी बातें
- ईरान ने जॉर्डन के मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस पर 10 मिसाइलें दागने का दावा किया।
- ईरानी मीडिया ने एयर बेस को भारी नुकसान पहुंचने की बात कही।
- जॉर्डन ने दावा खारिज करते हुए कहा कि सभी मिसाइलें इंटरसेप्ट कर ली गईं।
- अमेरिकी एयर स्ट्राइक में आईआरजीसी के तीन सदस्यों की मौत के बाद तनाव और बढ़ गया।
- बहरीन, कुवैत और कतर समेत पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताएं गहरा गई हैं।
अमेरिकी हमले के बाद बढ़ा तनाव
इससे पहले अमेरिका ने ईरान के भीतर कई हवाई हमले किए थे। ईरानी समाचार एजेंसी मीजान के अनुसार, इन हमलों में आईआरजीसी के तीन सैन्य कर्मियों की मौत हुई। इसी कार्रवाई के बाद ईरान ने जवाबी हमला करने का दावा किया।
खाड़ी देशों में बढ़ी चिंता
ईरान पहले ही चेतावनी दे चुका है कि यदि उस पर हमले जारी रहे तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी निशाने पर होंगे। इसी कड़ी में ईरान ने बहरीन, कुवैत और कतर जैसे देशों पर भी हमला किया है। इन देशों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। पूरे पश्चिम एशिया में हालात पर दुनिया की नजर बनी हुई है।
ट्रंप के बयानों से बढ़ी अनिश्चितता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक ओर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई को मंजूरी देते नजर आ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर यह भी कह रहे हैं कि अमेरिका पूर्ण युद्ध नहीं चाहता। उनके इन बयानों ने आगे की रणनीति को लेकर असमंजस बढ़ा दिया है।