पूरा मिडिल ईस्ट अभी शोक में डूबा है. इसकी वजह है, तेहरान साप्ताहिक शोक मना रहा है. यह शोक अपने दिवंगत नेता के लिए है. अली खामेनेई की हत्या अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमले में हो गई थी. चार महीने पहले 28 फरवरी को हुए हमले के बाद से मिडिल ईस्ट में जंग छिड़ गई थी. इसकी आंच अन्य देशों पर भी पहुंची, जहां अमेरिका के एयरबेस मौजूद थे. इनमें सऊदी अरब भी शामिल था. लेकिन अब कुछ ऐसा हुआ, जिसने दुनिया में कूटनीतिक समझ रखने वालों का ध्यान खींचा है.
ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई को सऊदी अरब ने श्रद्धांजलि दी है. हालांकि, विवाद इस पर नहीं कि सऊदी अरब ने श्रद्धांजलि दी, बल्कि इस वजह से हुआ है कि श्रद्धांजलि के दौरान पढ़ी गई कुरान की पंक्तियों पर सवाल खड़े हो रहे हैं. इन पंक्तियों का अलग मतलब निकाला जा रहा है. बकायदा इंटरनेट पर इसको लेकर बहस देखने को मिल रही है. वही, कयास लगाए जा रहे कि सऊदी अरब इन पंक्तियों के जरिए किसी तरह का संदेश दुनिया को देना चाहता हो?
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कुरान की किन पंक्तियों से छिड़ा है विवाद
सऊदी अरब से कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए. कुरान की जिन पंक्तियों को पढ़ा गया है, उसे लोग क्षेत्रीय संघर्ष के तौर पर देख रहे हैं. दरअसल, हुआ यूं कि सऊदी का डेलीगेशन ईरान अली खामेनेई को श्रद्धांजलि देने पहुंचा. इस डेलीगेशन का नेतृत्व वहां डिप्टी फॉरेन मिनिस्टर वलीद अल खेरेजी कर रहे थे. 3 जुलाई को इस डेलीगेशन ने ताबूत के सामने प्रार्थन की, और श्रद्धांजलि दी.
इसमें कुरान की जो पंक्तियां पढ़ीं गईं, वह कुरान के अल इमरान की 3:13 पंक्ती है. इस कुरान में बद्र की लड़ाई का जिक्र है. इसका मतलब है कि दो सेनाएं हैं, पहली वो जो अल्लाह के लिए लड़ रही है, और दूसरी जो उनको नहीं मानती है. अब अल्लाह जिसे चाहे जीत दे. ऐसे में माना जा रहा है कि इन पंक्तियों के जरिए सऊदी ने स्पष्ट किया है कि ईरान अल्लाह के लिए लड़ रहा है. सऊदी के अलावा मिडिल ईस्ट के इलाके के कई नेता खामेनेई को श्रद्धांजलि देने पहुंचे.
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