कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र लिखकर जंतर-मंतर पर चल रहे अपने प्रदर्शन पर चुप्पी तोड़ने की अपील की। पार्टी ने प्रधानमंत्री से कहा कि वे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को कथित परीक्षा पेपर लीक और छात्रों की आत्महत्या के मामलों में जवाबदेह ठहराएं।
15वें दिन भी जारी है प्रदर्शन
सीजेपी ने बताया कि उसका विरोध प्रदर्शन अब 15वें दिन में पहुंच गया है। वहीं, शिक्षा सुधारों की मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पिछले सात दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। पार्टी ने अपने दो पन्नों के पत्र ‘इंसानियत का एक सवाल: आप कब तक जंतर-मंतर को नज़रअंदाज़ करते रहेंगे?’ में पूछा कि इतने लंबे समय से शांतिपूर्ण प्रदर्शन और भूख हड़ताल के बावजूद प्रधानमंत्री की ओर से कोई प्रतिक्रिया क्यों नहीं आई।
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‘हमारी आवाज कब सुनेंगे?’
पत्र में कहा गया है कि जंतर-मंतर पर बैठा आंदोलन सिर्फ एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि देश के युवाओं के भविष्य को बचाने की कोशिश है। पार्टी ने लिखा कि जब सोनम वांगचुक जैसे व्यक्ति, जिन्होंने अपना जीवन शिक्षा और देश के लिए समर्पित किया है, भूख हड़ताल पर बैठते हैं तो सरकार की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह उनकी बात सुने। लेकिन अब तक प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं कहा है।
पेपर लीक और छात्र आत्महत्याओं का उठाया मुद्दा
सीजेपी ने आरोप लगाया कि सरकार बार-बार होने वाले परीक्षा पेपर लीक रोकने में नाकाम रही है। इससे करोड़ों छात्रों का भविष्य और भरोसा प्रभावित हुआ है। पार्टी ने यह भी कहा कि प्रदर्शन शुरू होने से पहले छात्रों की आत्महत्या के 11 मामले सामने आए थे, जो अब बढ़कर 29 हो गए हैं। पार्टी ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इन घटनाओं की नैतिक जिम्मेदारी नहीं ली और इस्तीफा भी नहीं दिया।
पुलिस पर भी लगाए गंभीर आरोप
पत्र में दावा किया गया कि प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस के कुछ जवानों ने छात्रों के साथ बदसलूकी की और उनकी किताबें कीचड़ में फेंक दीं। पार्टी ने आरोप लगाया कि छत्रपति शिवाजी महाराज, डॉ. भीमराव आंबेडकर और भगत सिंह से जुड़ी किताबों का भी अपमान किया गया। सीजेपी ने इस मामले में दो पुलिस अधिकारियों को तुरंत निलंबित करने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि छात्रों को प्रदर्शन स्थल पर एक छोटी लाइब्रेरी तक चलाने की अनुमति नहीं दी गई, जो ज्ञान और शिक्षा के प्रति सरकार के रवैये को दर्शाता है।
‘हमें आतंकवादी कहा गया’, प्रधानमंत्री से की ये मांग
इस दौरान सीजेपी ने आरोप लगाया कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने आंदोलनकारियों को “आतंकवादी’ कहा, जबकि सत्तारूढ़ दल के अध्यक्ष ने भी आंदोलन में शामिल युवाओं के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की। पत्र में कहा गया कि सरकार ने बातचीत करने के बजाय प्रदर्शनकारियों के प्रति अपमानजनक रवैया अपनाया है। सीजेपी ने प्रधानमंत्री से अपील की कि वे अपनी चुप्पी तोड़ें, युवाओं की आवाज सुनें और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को जवाबदेह ठहराएं। पार्टी ने कहा कि यदि सरकार शांतिपूर्ण आंदोलन की भी अनदेखी करती रही तो यह युवाओं के प्रति उसके नजरिये को दिखाता है।
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कई नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मिला समर्थन
इस आंदोलन को कई विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं का समर्थन मिला है। इनमें माकपा के एम. ए. बेबी और वृंदा करात, भाकपा के डी. राजा और एनी राजा, सीपीआई (एमएल) लिबरेशन के दीपांकर भट्टाचार्य, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज और निखिल डे, तथा तृणमूल कांग्रेस की सांसद सागरिका घोष और महुआ मोइत्रा शामिल हैं।
क्यों शुरू हुआ आंदोलन?
यह प्रदर्शन 20 जून से शुरू हुआ था। आंदोलनकारी नीट-यूजी समेत कई प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के खिलाफ कार्रवाई, शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा छात्रों को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं।


