अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. इसमें चुनाव के बाद पहुंचे कुछ मेल इन बैलेट भी मान्य होंगे. सुप्रीम कोर्ट ने यह फैसला 5-4 के बहुमत से सुनाया है. यदि किसी राज्य का कानून इसकी अनुमति देता है, तो चुनाव दिवस तक पोस्टमार्टम किए गए मेल इन बैलेट चुनाव के बाद पहुंचने पर भी गिने जा सकते हैं.
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर कितने जज हुए सहमत, जानें क्या कहा गया है?
फैसला वॉट्सन, मिसिसिपी सेक्रेटरी ऑफ स्टेट बनाम रिपब्लिकन नेशनल कमिटी यानी आरएनसी केस में आया है. बहुमत की ओर से जस्टिस एम कोनी बैरेट ने कहा है कि फेडरल लॉ के तहत मेल इन बैलेट का चुनाव के दिन तक पहुंचना अनिवार्य नहीं है. इस फैसले से चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स और जस्टिस एलेना केगन, केतनजी ब्राउन जैक्सन और सोनिया सोटोमायोर भी सहमत रहे.
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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर ट्रंप ने जताई नाराजगी
अब इस फैसले पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रिएक्शन आया है. इसमें मेल इन बैलेट यानी डाक से भेजे गए वोट पर आए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को बड़ा नुकसान करार दिया है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर यह रिएक्शन दिया है. ट्रंप ने साथ ही सीनेट में रिपब्लिकन सांसदों से सेव अमेरिका एक्ट को जल्द पारित करने की अपील की. सुप्रीम कोर्ट ने 5-4 के बहुमत से फैसला दिया कि यदि किसी राज्य का कानून अनुमति देता है, तो चुनाव दिवस तक पोस्टमार्क किए गए मेल-इन बैलेट चुनाव के बाद भी गिने जा सकते हैं.
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