भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक बड़ी जानकारी साझा की है। उन्होंने बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहे संकट के कारण इस्राइल और छह देशों के खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के साथ भारत की मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की बातचीत अभी रुक गई है। पीयूष गोयल इस समय ग्रीस की राजधानी एथेंस की आधिकारिक यात्रा पर हैं। वहां उन्होंने ‘इंडिया-ग्रीस बिजनेस फोरम’ में यह बात कही।
इन देशों के साथ बातचीत जारी
मंत्री ने साफ किया कि भले ही कुछ देशों के साथ बातचीत रुकी है, लेकिन कई अन्य देशों और समूहों के साथ चर्चा सक्रिय रूप से चल रही है। भारत इस समय चिली, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका की अगुवाई वाले ‘साकू’ (SACU) समूह, रूस की अगुवाई वाले यूरेशिया गुट और ‘मर्कोसुर’ के साथ व्यापार समझौतों के लिए बातचीत कर रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि कनाडा के साथ बातचीत बहुत आगे बढ़ चुकी है और अंतिम चरण में है।
बातचीत में शामिल अलग-अलग समूह
इस बातचीत में शामिल अलग-अलग समूहों में कई देश शामिल हैं। ‘मर्कोसुर’ ब्लॉक में ब्राजील, अर्जेंटीना, उरुग्वे और पराग्वे जैसे देश हैं। यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) में रूस, आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान शामिल हैं। वहीं, ‘साकू’ (SACU) समूह में दक्षिण अफ्रीका, नामीबिया, बोत्सवाना, लेसोथो और इस्वातिनी देश आते हैं। खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) में सऊदी अरब, यूएई, कतर, कुवैत, ओमान और बहरीन शामिल हैं।
भारत की पिछली उपलब्धियां और लक्ष्य
पीयूष गोयल ने बताया कि भारत ने पिछले साढ़े तीन साल में नौ व्यापार समझौतों को अंतिम रूप दिया है। इन समझौतों में ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, यूएई और ऑस्ट्रेलिया जैसे 38 विकसित और समृद्ध देश शामिल हैं। भारत ने अपना निर्यात बढ़ाने के लिए बड़े लक्ष्य रखे हैं। सरकार का लक्ष्य इस वित्त वर्ष में निर्यात को 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना है। अगले पांच वर्षों में इसे 2 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने की योजना है।
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भारत और ग्रीस के बीच सहयोग
भारत और ग्रीस के बीच अभी 1.3 बिलियन डॉलर का व्यापार होता है। मंत्री ने कहा कि यह काफी कम है और इसे 2030 तक दोगुना करने का लक्ष्य है। उन्होंने सहयोग के लिए चार मुख्य क्षेत्र बताए: शिपिंग और लॉजिस्टिक्स, स्वच्छ ऊर्जा (सौर, पवन और परमाणु ऊर्जा), तकनीक और प्रोसेस्ड फूड। ग्रीस की समुद्री ताकत बहुत बड़ी है और वह दुनिया की शिपिंग क्षमता का पांचवां हिस्सा संभालता है। दोनों देश जहाज निर्माण और बंदरगाह विकास में मिलकर काम कर सकते हैं। इसके अलावा अंतरिक्ष विज्ञान और सैटेलाइट के क्षेत्र में भी सहयोग की काफी संभावनाएं हैं।

