पश्चिम बंगाल के लिए आज बड़ा दिन है। राज्य की नवनिर्वाचित भाजपा सरकार सोमवार (29 जून) को समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक को विधानसभा में पेश कर सकती है। बंगाल में इस विधेयक की महज चर्चाओं ने ही सियासी सरगर्मियां छेड़ दीं। कांग्रेस, वाम दल और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कई नेताओं ने इस पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री शुभेंदु सरकार ने हाल ही में साफ कर दिया था कि बंगाल में यूसीसी विधेयक चरणबद्ध तरीके से लाया और फिर पारित कराने के बाद लागू कराया जाएगा।
ऐसे में यह जानना अहम है कि आखिर यह समान नागरिक संहिता क्या है? संविधान इस मुद्दे पर क्या कहता है? इसका इतिहास क्या है? हमारे संविधान निर्माताओं ने समान नागरिक संहिता पर क्या बहस की थी? किसने इसका समर्थन किया था? कानून के विरोध में कौन था? समान नागरिक संहिता लाने का मूल मकसद क्या है? आइये जानते हैं…


