Mango Export News: गर्मियों के मौसम का इंतजार लोग एक खास वजह से करते हैं, और वो वजह है ‘आम’. यूं ही इसे फलों का राजा नहीं कहा जाता है. आम भारत में फूलता- फलता है लेकिन विदेश में भी इसकी खूब पूछ परख है. इसलिए हर साल इस मौसम में आम बड़ी मात्रा में विदेशों में एक्सपोर्ट किया जाता है. लेकिन इस बार भारतीय आमों के निर्यात को एक बड़ी सफलता मिली है. अब आम का निर्यात समुद्री रास्ते से किया जाएगा.
आमों के निर्यात को मिली बड़ी सफलता
दरअसल भारतीय आमों के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए इस दिशा में कदम उठाया जा रहा है. अब आमों का निर्यात प्लेन से नहीं बल्कि समुद्री रास्ते से होगा. ये सफलता तब मिली, जब आंध्र प्रदेश के 4.3 टन बंगनपल्ली आम एक विशेष रेफ्रिजरेटेड (रीफर) कंटेनर में सफलतापूर्वक सिंगापुर भेजे गए. इस तकनीक को ICAR-केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (ICAR-CISH), लखनऊ ने APEDA के साथ मिलकर विकसित किया है.
ये भी पढ़ें: King Charles III: राजा भी चुकाते हैं टैक्स, किंग चार्ल्स ने भरा 373 करोड़ का महसूल, इतिहास में पहली बार हुआ सार्वजनिक
लागत भी होगी कम
अब तक प्रीमियम भारतीय आमों का निर्यात ज्यादातर हवाई मार्ग से यानी प्लेन होता था. इसमें परिवहन लागत 150 से 250 रुपये प्रति किलोग्राम तक आती थी. वहीं समुद्री रास्ते से भेजे जाने केबाद ये लागत कम हो जाएगी. इसका खर्च घटकर 13 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम हो सकती है. यानी निर्यातकों का खर्च काफी कम होगा.
लंबा सफर हो पाएगा तय?
आमों के समुद्री मार्ग से निर्यात में सबसे बड़ी चुनौती ये थी कि लंबे समुद्री सफर के दौरान आम खराब न हों. इसके लिए वैज्ञानिकों ने ऐसी तकनीक बनाई है, जिसमें बिना केमिकल वाली खेती, गुड एग्रीकल्चरल प्रैक्टिस (GAP), वैज्ञानिक तरीके से तुड़ाई, ग्रेडिंग, पैकिंग और कटाई के बाद सही मैनेजमेंट अपनाया गया. इसके अलावा आमों पर हॉट वॉटर ट्रीटमेंट और CISH-Met Wash तकनीक का इस्तेमाल किया गया, जिससे उनकी गुणवत्ता बनी रही, बीमारियों का खतरा कम हुआ और शेल्फ लाइफ बढ़ गई. इस नई तकनीक से 30 दिनों तक आम ताजा रह सकते हैं.
ये भी पढ़ें: जींस में छुपा रखा था सवा 3 करोड़ का सोना, एयरपोर्ट पर धरे गए, विदेश से गोल्ड लाने के क्या नियम हैं?


