इंदौर को ‘फ्लायओवर और ब्रिजों का शहर’ बनाने की होड़ में लोक निर्माण विभाग, एमपीआरडीसी और मेट्रो प्रशासन अपनी बुनियादी जिम्मेदारियों को पूरी तरह भूल चुके हैं। मानसून की दस्तक बेहद नजदीक आ चुकी है, लेकिन जिन सर्विस रोड के भरोसे शहर के लाखों वाहनों का ट्रैफिक डाइवर्ट किया गया है, उनकी हालत खुद बेहद गंभीर बनी हुई है। मानसून सिर पर आ गया है, लेकिन मुख्य सड़कों पर वाहनों के मार्ग में पड़े बैरिकेड्स और खुले गड्ढे जिम्मेदारों की साफ लापरवाही दर्शा रहे हैं। वहीं देवास नाका, मूसाखेड़ी सहित अन्य प्रमुख चौराहों पर जलजमाव और ड्रेनेज की बदहाली को लेकर निर्माण एजेंसियों ने अधिकारियों को केवल ‘अवगत’ कराकर अपने कर्तव्यों से इतिश्री कर ली है।

निर्माण कार्यों में लापरवाही से लगातार हो रहे जानलेवा हादसे
शहर में चल रहे विकास कार्यों के बीच सुरक्षा मानकों की अनदेखी जनता पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ समय में फ्लायओवर, एलिवेटेड कॉरिडोर और मेट्रो रेल प्रोजेक्ट के निर्माण स्थलों पर बैरिकेडिंग और सुरक्षा जाली की कमी के कारण लगातार हादसे हो रहे हैं। कई जगहों पर बिना किसी चेतावनी बोर्ड के अचानक खोदे गए गड्ढों और क्रेन ऑपरेशन्स के दौरान लापरवाही से राहगीर चोटिल हो रहे हैं। देर रात विजिबिलिटी कम होने से ये निर्माण स्थल डार्क स्पॉट में तब्दील हो जाते हैं, जिससे दोपहिया वाहन चालक सीधे इन हादसों का शिकार बन रहे हैं।
पहली ही बारिश में लगा घंटों लंबा जाम, रेंगते रहे वाहन
जैसे ही मानसून की शुरुआती फुहारें गिरती हैं, शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाती है। सर्विस सड़कों पर कीचड़, गड्ढों और जलभराव के कारण वाहनों की रफ्तार थम जाती है। विशेष रूप से पीक ऑवर्स के दौरान प्रमुख चौराहों पर कई किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग रहा है। डाइवर्जन वाले रास्तों पर वाहनों का दबाव बढ़ने और सड़कों पर पानी जमा होने से एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं भी इस लंबे जाम में फंसने को मजबूर हैं, जिससे आम जनता को भारी मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना झेलनी पड़ रही है। मंगलवार को पहली बार एक घंटे रुक रुककर बारिश हुई और आधा शहर रेंगने को मजबूर हो गया। पलासिया, विजय नगर, अरविंदो, एयरपोर्ट, देवास नाका में लंबा जाम लगा और वाहन चालक परेशान होते रहे।
देवास नाका पर कछुआ चाल से चल रहा फ्लायओवर का काम
देवास नाका क्षेत्र में लंबे समय से फ्लायओवर और कांक्रीट की सर्विस रोड बनाने का काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। वर्तमान में मांगलिया से देवास नाका आने वाली एकतरफा सड़क का निर्माण तो पूरा हो गया है, लेकिन मांगलिया की तरफ जाने वाले हिस्से में आज भी गहरे गड्ढे और धूल का साम्राज्य है। इसके अलावा, सत्यसाईं से निरंजनपुर आने वाले मार्ग पर पिछले महीने ही कांक्रीट सड़क शुरू करने का दावा किया गया था, जो जमीनी हकीकत में पूरी तरह झूठा साबित हो चुका है।
सत्यसाईं चौराहे पर के आसपास पड़े बैरिकेड्स से हो रहे हादसे
सत्यसाईं चौराहे से विजय नगर की ओर से आने वाले वाहनों के लिए सर्विस रोड को इतना संकरा कर दिया गया है कि पीक ऑवर्स के दौरान यहां वाहनों को रेंग-रेंगकर चलने पर मजबूर होना पड़ता है। बची-खुची कसर सड़क पर अवैध रूप से पार्क होने वाली गाड़ियां पूरी कर रही हैं। यहां ड्रेनेज के चैंबर के ढक्कन गायब हैं और पेवर ब्लॉक पूरी तरह उखड़ चुके हैं। पहली ही बारिश में यहां जलजमाव होते ही ये खुले हुए ड्रेनेज चैंबर राहगीरों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं।
रिंग रोड, मूसाखेड़ी और आईटी पार्क चौराहे पर उखड़ा पैचवर्क
राजीव गांधी चौराहे की तरफ जाने वाले वाहन चालकों के लिए आईटी पार्क चौराहा इस समय सबसे बड़ी मुसीबत बन चुका है। यहां सड़क के बीच का पूरा पैचवर्क उखड़ गया है। ठेकेदार द्वारा कहीं कांक्रीट तो कहीं डामर का ऐसा ऊबड़-खाबड़ मिश्रण तैयार किया गया है, जिसके कारण दोपहिया वाहन चालक रोजाना फिसलकर दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं। वहीं दूसरी ओर, मूसाखेड़ी में हर साल होने वाली जलजमाव की गंभीर समस्या को लेकर नगर निगम प्रशासन अब तक गहरी नींद में सोया हुआ है।
रेत मंडी क्रॉसिंग पर गायब हुआ डामर, बची सिर्फ कच्ची मिट्टी
एबी रोड स्थित रेत मंडी क्रॉसिंग पर ब्रिज निर्माण के नीचे की जमीन और सड़कें पूरी तरह से उखड़ चुकी हैं। स्थिति इतनी बदतर है कि कुछ हिस्सों में तो डामर का नामोनिशान तक नहीं बचा है और सिर्फ कच्ची मिट्टी दिखाई दे रही है। मानसून से पहले प्रशासन द्वारा यहां डामर या गिट्टी डालने का पैचवर्क तक नहीं कराया गया है, जिससे बारिश में यहां दलदल जैसी स्थिति बन सकती है।
मांगलिया ओवरब्रिज के पास उड़ती धूल से स्थानीय लोग परेशान
मांगलिया क्षेत्र में भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम डिपो के समीप बन रहे रेलवे ओवर ब्रिज के आसपास की सर्विस रोड पूरी तरह कच्ची और ऊबड़-खाबड़ हो चुकी है। इस मार्ग से दिनभर गुजरने वाले भारी-भरकम ऑइल टैंकरों और अन्य मालवाहक वाहनों के कारण उड़ने वाली अत्यधिक धूल ने स्थानीय निवासियों और राहगीरों का जीना मुहाल कर दिया है। क्षेत्र के लोगों में सांस से जुड़ी बीमारियां होने लगी हैं। आशंका है कि आगामी बारिश के दौरान यह कच्ची सड़क पूरी तरह धंस जाएगी।

