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मेटा, अमेजन जैसी कंपनियों में एआई का उपयोग सीमित:तेजी से आ रहे नए मॉडल महंगे होने से बढ़ा खर्च; उपयोग को लेकर बढ़ी अनिश्चितता

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इस साल की शुरुआत में टेक कंपनियां कर्मचारियों को ज्यादा से ज्यादा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित कर रही थीं। कई जगह कर्मचारियों के बीच एआई टूल्स पर खर्च होने वाले ‘टोकन’ की गिनती को लेकर प्रतिस्पर्धा तक चल रही थी, लेकिन कुछ ही महीनों में तस्वीर बदल गई है। अब मेटा, अमेजन, उबर और वॉलमार्ट जैसी बड़ी कंपनियां कर्मचारियों से एआई का उपयोग सीमित रखने को कह रही हैं। इस बदलाव की सबसे बड़ी वजह बढ़ती लागत है। एआई सेवाएं देने वाली कंपनियों ओपन एआई और एंथ्रोपिक के बिल तेजी से बढ़ने लगे हैं। एआई की दुनिया में ‘टोकन’ भाषा की सबसे छोटी इकाई होती है, जिस पर उपयोग की लागत तय होती है। कर्मचारियों के बीच अधिक से अधिक टोकन इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति को‘टोकन मैक्सिंग’ कहा जाता है। अब इसकी जगह ‘टोकनमिनि माइजिंग’ का दौर शुरू होता दिख रहा है। मेटा और अमेजन जैसी कंपनियों में कर्मचारियों के बीच टोकन उपयोग के लीडर बोर्ड तक बनाए गए थे। लेकिन अब हजारों कर्मचारियों द्वारा एआई टूल्स के इस्तेमाल में होने वाला खर्च कंपनियों के लिए भारी पड़ने लगा है। सब्सक्रिप्शन फीस के अलावा कंपनियों को इस्तेमाल किए गए टोकनों का अलग भुगतान भी करना पड़ता है। खर्च इसलिए भी बढ़ रहा है क्योंकि नए एआई मॉडल पहले की तुलना में ज्यादा शक्तिशाली और महंगे हैं। एंथ्रोपिक का नया मॉडल ‘फेबल’ उसके पुराने मॉडल ‘ओपस’ से करीब दोगुना महंगा बताया जा रहा है। वहीं इंजीनियर अब साधारण चैटबॉट की जगह जटिल कार्य करने वाले एआई एजेंट्स का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनमें हजारों टोकन खर्च हो सकते हैं। उदाहरण के तौर पर एआई को कंपनी की बैठक का संक्षिप्त ब्योरा तैयार करने जैसे सरल कम में कुछ सौ टोकन लग सकते हैं जबकि नया प्रोडक्ट या फीचर बनाने जैसे काम के कोड लिखने में हजारों टोकन लगते हैं। न्यूरोमेट्रिक के सीईओ रॉब में के मुताबिकएआई की दुनिया इतनी तेजी से बदल रही है कि कंपनियां खुद तय नहीं कर पा रहीं कि किस रणनीति पर आगे बढ़ें। ऐसे में कई कंपनियां अब एआई पर किए जा रहे निवेश से मिलने वाले वास्तविक रिटर्न का दोबारा आकंलन कर रही हैं। लागू किया जा रहा है फायदे-नुकसान का गणित‎ कुछ माह में ही एआई के उपयोग पर अनिश्चितता का माहौल। सीमित उपयोग किए जाने से खर्च में भारी कटौती संभव। जहां ज्यादा फायदा वहां उपयोग, बाकी जगह कटौती। निवेश पर रिटर्न के पहलू कोध्यान में रखा जाएगा। सही एआई मॉडल अपनाने से 90% खर्च बच सकता है टेलीकॉम कंपनी एटीएंडटी के चीफ एआई अधिकारी एंडी मार्कस कहते हैं, कंपनियां कम आधुनिक एआई मॉडल्स को अपनाकर खर्च में 90 फीसदी तक बचत कर सकती हैं। हमारे इंजीनियर कुछ कामों के लिए सबसे अधिक ताकतवर और अन्य कामों के लिए कम शक्तिशाली एआई मॉडल का उपयोग करते हैं। कंपनियां कम खर्च में बेहतर नतीजों पर कर रहीं फोकस कंपनियां एआई पर भारी खर्च जारी रखेंगी लेकिन वे ऐसी जगह खोज रही हैं जहां कम खर्च में बेहतर नतीजे हासिल किए जा सकें। सेल्सफोर्स के सीई मार्क बेनिऑफ का कहना है, उनकी कंपनी की योजना इस साल एआई पर करोड़ों रुपए खर्च करने की है पर टोकनों की जगह काम पर ज्यादा ध्यान दिया जाएगा। उबर और वॉलमार्ट ने एआईटूल्स के लिए सीमा तय की मई में टैक्सी सर्विस कंपनी उबर ने कहा कि उसका साल भर के लिए अनुमानित एआई खर्च सिर्फ चार माह में खत्म हो गया है। कंपनी ने एआई कोडिंग टूल्स पर कुछ मासिक सीमा लगाई है। रिटेल कंपनी वॉलमार्ट ने अलग-अलग एआई टूल्स के लिए सीमा तय की है। टोकन के उपयोग को बताने वाले लीडर बोर्ड्स हटाए फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा ने पिछले सप्ताह अपने कर्मचारियों से कहा है कि खर्च में बहुत भारी बढ़ोतरी को देखते हुए वह जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) का इस्तेमाल सीमित करेगी। एआई के उपयोग को सीमित करने के लिए अमेजन और मेटा ने टोकन मैक्सिंग की बढ़त बताने वाले लीडरबोर्ड्स भी हटा लिए हैं।

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