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AI टीचर्स के लिए चुनौती,असाइनमेंट में जानबूझकर गलतियां:एआई पकड़ने वाले टूल्स ही सिखा रहे बचने के तरीके; अब हार्वर्ड में होगी मौखिक परीक्षा

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शिक्षा क्षेत्र में एआई की एंट्री ने पहले ही टीचर्स की नींद उड़ा रखी थी। लेकिन, अब मामला गंभीर हो चुका है। बड़ी टेक कंपनियों से लेकर छोटे स्टार्टअप्स तक, ऐसे नए एआई टूल्स का जमकर प्रचार कर रहे हैं, जो छात्रों को टीचर्स और एआई डिटेक्टर्स को चकमा देने की खुली छूट दे रहे हैं। दिलचस्प पहलू ये है कि छात्रों को ऐसे टूल्स देने वाली कंपनियां ही टीचर्स और संस्थानों को चोरी पकड़ने वाले सॉफ्टवेयर बेच रही हैं। टेक जगत में इसे ‘डिटेक्शन आर्म्स रेस’ यानी पकड़ने और बचने की आधुनिक जंग कहा जा रहा है। ऐसे में, हार्वर्ड जैसी यूनिवर्सिटीज अब पारंपरिक निबंधों के बजाय ‘इन-क्लास पेन-पेपर टेस्ट’ और मौखिक परीक्षा को प्राथमिकता दे रही हैं। दरअसल, सोशल मीडिया पर इन दिनों छात्रों के लिए ट्यूटोरियल्स और विज्ञापनों की बाढ़ है। ऑफर दिया जा रहा है- ‘एआई से होमवर्क कराओ और पकड़े भी मत जाओ।’ दो टूल ह्यूमनाइजर्स और ऑटोटाइपर्स छात्रों के पसंदीदा बने हुए हैं। शिक्षक छात्रों की चोरी पकड़ने के लिए असाइनमेंट की वर्जन हिस्ट्री जांचते हैं। अगर एक हजार शब्दों का निबंध अचानक एक मिनट में कॉपी-पेस्ट हो जाए, तो साफ हो जाता है कि यह एआई का काम है। टेक कंपनियों ने इसका तोड़ निकाला है। ह्यूमनाइजर्स टूल एआई टेक्स्ट को इंसानी अंदाज में बदल देता है। वहीं, ऑटोटाइपर्स टूल शब्दों को धीरे-धीरे टाइप करता है, टाइपिंग में जानबूझकर गलतियां करता है और उन्हें सुधारता है, ताकि लगे कि इंसान सोच-समझकर लिख रहा है। कुछ एप प्रचार कर रहे हैं कि जब छात्र सैर-सपाटे पर हों और असाइनमेंट की डेडलाइन करीब हो तो वे ऐसा डॉक्यूमेंट बनाकर देंगे, जो छात्रों द्वारा लिखा गया ही दिखेगा। ऐसे टूल्स ज्यादातर वही कंपनियां दे रही हैं, जो एआई चोरी पकड़ने वाले सॉफ्टवेयर बेचती हैं। जैसे- ‘ग्रामरली’ प्रोफेसर्स को एआई की चोरी पकड़ने के लिए ‘ऑथरशिप टूल’ बेचता है, तो छात्रों को पूरा निबंध लिखने और एआई डिटेक्टर से बचने के लिए टेक्स्ट को ह्यूमनाइज करने की छूट देता है। ‘जीपीटीजीरो’ एआई कंटेंट पकड़ने का दावा करता है, लेकिन सोशल मीडिया पर ‘फर्जी प्रोफेसर’ का किरदार बनाकर छात्रों को सिखाया कि कैसे इस टूल के जरिए वे असली प्रोफेसर्स को चकमा देकर बेहतर ग्रेड ला सकते हैं। टाइपिंग पैटर्न, राइटिंग रीप्ले जैसी तकनीकों से हो रही निगरानी एआई जनरेटेड असाइनमेंट व चीटिंग टूल्स से निपटने के लिए वैश्विक स्तर पर 3 उपाय कारगर हैं। ‘जीपीटी जीरो’ छात्रों के टाइपिंग पैटर्न, सोचने के समय और बदलावों का बैकग्राउंड में लाइव वीडियो ट्रैक रिकॉर्ड रखती हैं। यह राइटिंग रीप्ले तकनीक ऑटोटाइपर्स की चोरी पकड़ने में सबसे सटीक है। ‘गूगल डीपमाइंड’ एआई-टेक्स्ट में अदृश्य कोड (डिजिटल वॉटरमार्किंग) छिपाते हैं, जिससे एआई डिटेक्टर्स उसे तुरंत पहचान लेते हैं।

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