अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ताजा बयानों ने वैश्विक हलचल पैदा कर दी है। ट्रंप ने ईरान और इस्राइल के बीच चल रहे विवाद को सुलझाने का बड़ा दावा किया है। जब ट्रंप से पूछा गया कि वे इस्राइली पीएम को अमेरिका-ईरान बातचीत में बाधा डालने से कैसे रोकेंगे, तो उन्होंने खुद को समस्या सुझाने वाला (प्रॉब्लम सॉल्वर) बताया। ट्रंप ने कहा कि वे अपनी योजना का खुलासा नहीं करेंगे, लेकिन वे इस समस्या को बहुत जल्दी सुलझा लेंगे। उन्होंने भरोसा जताया कि वे बीबी (नेतन्याहू) से जुड़े मामले को भी सुलझा लेंगे। ट्रंप का यह बयान नेतन्याहू के कल के बयान के बाद आया है कि इस्राइली सेना लेबनान में बनी रहेगी।

ट्रंप ने स्टार्मर को घेरा
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर के इस्तीफे पर भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने स्टार्मर की आलोचना इसलिए की क्योंकि उन्होंने ऊर्जा के क्षेत्र में बहुत गलतियां कीं। ट्रंप के अनुसार, ब्रिटेन ने हर जगह पवन चक्कियां लगा दी हैं, जबकि उनके पास उत्तरी सागर में तेल का बड़ा भंडार मौजूद है। पर्यावरण के नाम पर वहां तेल निकालने की अनुमति नहीं दी गई, जो एक गलत फैसला था।
ट्रंप ने नाटो के मुद्दे पर भी स्टार्मर की भूमिका को खराब बताया। उन्होंने कहा कि स्टार्मर ने कुछ हफ्तों के लिए एक द्वीप का इस्तेमाल करने से मना कर दिया था। ट्रंप के मुताबिक, इस फैसले ने स्टार्मर की छवि को बहुत नुकसान पहुंचाया। ट्रंप ने आगे कहा कि स्टार्मर के सामने तीन बड़ी चुनौतियां थीं- ऊर्जा संकट, अवैध प्रवासियों का आना और बढ़ता अपराध। इन समस्याओं को न संभाल पाना ही उनकी विफलता का कारण बना। हालांकि, ट्रंप ने उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
इस्राइल ने क्या कहा था?
वहीं ट्रंप के इन बयानों से पहले इस्राइली पीएम नेतन्याहू ने ईरान और लेबनान को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। कल उन्होंने कहा जब तक वे प्रधानमंत्री हैं, ईरान कभी भी परमाणु हथियार नहीं बना पाएगा। नेतन्याहू ने कहा कि चाहे कोई समझौता हो या न हो, वे ईरान को परमाणु शक्ति नहीं बनने देंगे।
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लेबनान के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इस्राइली सेना दक्षिण लेबनान के सुरक्षा क्षेत्र में बनी रहेगी। उन्होंने अमेरिका का उदाहरण देते हुए अपनी कार्रवाई को सही ठहराया। नेतन्याहू ने कहा कि अगर किसी और देश पर हजारों आतंकवादी रॉकेट और मिसाइलें दागते, तो वह देश भी अपनी सुरक्षा के लिए सीमा पार जाकर आतंकियों को खत्म करता। उन्होंने साफ किया कि जब तक इस्राइल के लोगों पर खतरा बना रहेगा, उनकी सेना वहां से नहीं हटेगी। नेतन्याहू ने कहा कि वे अपने नागरिकों की रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाएंगे।
