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यूएस-ईरान डील के बाद अब जमकर तेल बेचेगा तेहरान, टॉप देशों में चीन शामिल, क्या भारत का भी नाम?

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अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से चल रहे संघर्ष और तनाव को खत्म करने के लिए गुरुवार (18 जून 2026) को समझौते पर हस्ताक्षर किया गया. इस समझौते का मकसद दोनों पक्षों के बीच सीजफायर को बढ़ाना और होर्मुज स्ट्रेट से शिपिंग ट्रांजिट फिर से शुरू करना है. इस डील के साथ ही ग्लबोल एनर्जी सप्लाई चेन के सामान्य होने की भी संभावना जताई जा रही है. इस बीच भारत में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फथाली ने कहा कि ईरान के पास भारत के एनर्जी जरूरतों को पूरा करने की बड़ी क्षमता है.

ईरान पर से प्रतिबंध हटाए गए

अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय समझौते के तहत तेहरान पर लगे सभी प्रतिबंध हटा लिए गए हैं. ईरान दुनिया को अब तेल बेच सकता है. न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए इंटरव्यू में मोहम्मद फथाली ने कहा, ‘भारत को भरोसेमंद, स्थिर और किफायती ऊर्जा सप्लाई की जरूरत है. ईरान के पास इन जरूरतों को पूरा करने की बड़ी क्षमता है. अगर प्रतिबंध हटा दिए जाएं और हालात सामान्य हो जाएं, तो इसमें कोई शक नहीं कि ईरान एक बार फिर भारत के मुख्य तेल सप्लायर में से एक बन सकता है.’

‘ईरान भारत की तेल जरूरतों को पूरा करेगा’

उन्होंने कहा, ‘ईरान दुनिया के सबसे बड़े तेल उत्पादकों और निर्यातकों में से एक है. हमारी नीति हमेशा से यही रही है कि हम अपने ऊर्जा संसाधन उन सभी देशों को उपलब्ध कराएं, जो हमें चाहते हैं. ऐतिहासिक रूप से भारत ईरान के सबसे महत्वपूर्ण तेल ग्राहकों में से एक रहा है. दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग का लंबा और सफल ट्रैक रिकॉर्ड रहा है. भारत को भरोसेमंद, स्थिर और किफायती ऊर्जा सप्लाई की जरूरत है और ईरान के पास इन जरूरतों को पूरा करने की बड़ी क्षमता है.’

ईरानी राजदूत ने कहा, ‘अगर प्रतिबंध हटा दिए जाएं और हालात सामान्य हो जाएं, तो इसमें कोई शक नहीं कि ईरान एक बार फिर भारत के मुख्य तेल सप्लायर में से एक बन सकता है. हमें उम्मीद है कि प्रतिबंध पूरी तरह से हटने के बाद, न केवल भारत को ईरान का तेल निर्यात फिर से शुरू होगा, बल्कि द्विपक्षीय व्यापार और संयुक्त निवेश भी अपने पिछले उच्चतम स्तर को पार कर जाएंगे और हमारे दोनों देशों की वास्तविक क्षमता के अनुरूप स्तर तक पहुंच जाएंगे.’

चीन सबसे बड़ा खरीदार

चीन ईरान के कुल तेल निर्यात का लगभग 90% हिस्सा खरीदता रहा है. दोनों देशों के बीच 2021 में $400 बिलियन (लगभग 33 लाख करोड़ रुपये) का एक समझौता हुआ, जिसके तहत ईरान चीन को रियायती दरों पर तेल की आपूर्ति करता है. यह समझौता 25 साल का है. ईरान अमेरिका के हालिया जंग के दौरान चीन को सप्लाई होने वाला ऑयल भी प्रभावित हुआ था. ऐसे में ईरान पर से प्रतिबंध हटने के बाद वह चीन को पहले की तरह तेल सप्लाई शुरू कर देगा.

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