शिवसेना (यूबीटी) के लिए स्थिति और भी खराब होती दिख रही है। क्योंकि उसके नौ लोकसभा सांसदों में से छह ने गुरुवार को यहां संसदीय दल की बैठक में भाग नहीं लिया। जिससे यह संकेत मिलता है कि एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ शिवसेना में औपचारिक रूप से शामिल होना केवल समय की बात हो सकती है।
कौन-कौन बैठक में शामिल नहीं हुआ?
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत, अनिल देसाई और राजभाऊ वाजे, पार्टी के इकलौते राज्यसभा सांसद संजय राउत के साथ बैठक में शामिल हुए। शेष छह सांसदों की अनुपस्थिति ने पार्टी के संसदीय खेमे में विभाजन की पुष्टि कर दी। बैठक में शामिल नहीं होने वाले सांसदों में नागेश अष्टिकर, संजय देशमुख, संजय जाधव, संजय दीना पाटिल, ओमप्रकाश राजेनिम्बलकर और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल हैं।
शिंदे के शिवसेना में विलय की मांग
सूत्रों के अनुसार, सभी छह बागी सांसदों ने शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय की मांग करते हुए एक पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं। इसे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को सौंप दिया है। हालांकि, यह प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है, क्योंकि ऐसा माना जा रहा है कि अध्यक्ष कार्यालय को सत्यापन के लिए कुछ सांसदों की प्रत्यक्ष उपस्थिति की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि यह आने वाले दिनों में होने की उम्मीद है। सूत्रों ने बताया कि हस्ताक्षरों का सत्यापन फिलहाल जारी है।
बुधवार को शिवसेना (यूबीटी) ने अपने सांसदों को गुरुवार सुबह 11 बजे बैठक में उपस्थित होने का निर्देश देते हुए तीन लाइन का व्हिप जारी किया। इस कदम का उद्देश्य बागी नेताओं के खिलाफ अयोग्यता की कार्यवाही शुरू करने का मार्ग प्रशस्त करना था। लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के नौ सांसद हैं। वहीं, दलबदल विरोधी कानून के तहत अयोग्यता से बचने के लिए कम से कम छह सांसदों को एक साथ पाला बदलना होगा।
व्हिप का उल्लंघन, की जाएगी कार्रवाई
बैठक से पहले पत्रकारों से बात करते हुए सावंत ने कहा, ‘पार्टी प्रमुख (उद्धव ठाकरे) से परामर्श करने के बाद व्हिप का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।’ हालांकि, शिंदे खेमे के सूत्रों ने व्हिप की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसे दसवीं अनुसूची (दल-बदल विरोधी कानून) के तहत केवल सदन की कार्यवाही के लिए जारी किया जा सकता है। न कि पार्टी की आंतरिक बैठकों के लिए।
शिंदे खेमे के एक पदाधिकारी ने कहा, ‘अदालतों ने बार-बार यह माना है कि अगर एक राजनीतिक दल संगठनात्मक अनुशासन के मामले के रूप में आंतरिक निर्देश (बैठकों के लिए भी) जारी कर सकता है। लेकिन ऐसे व्हिप का पालन न करने पर दसवीं अनुसूची के तहत कोई परिणाम नहीं होता है, जब तक कि यह सदन में मतदान से संबंधित न हो।’
अध्यक्ष बिरला से मिले संसद
सूत्रों के अनुसार, शिंदे मंगलवार देर रात दिल्ली पहुंचे और बुधवार को मुंबई लौट गए। वे 2022 में अविभाजित शिवसेना में हुए विभाजन के मुख्य सूत्रधार थे। जिसके कारण महा विकास अघाड़ी सरकार गिर गई थी। बुधवार को सावंत, देसाई और राउत ने बिरला से मुलाकात की। उनसे किसी भी गैरकानूनी दलबदल से बचने का आग्रह किया। देसाई ने कहा था, ‘कानून के तहत, कोई भी पार्टी किसी अन्य पार्टी में विलय नहीं कर सकती। भले ही उसे दो-तिहाई सांसदों का समर्थन प्राप्त हो। केवल मूल पार्टी ही विलय कर सकती है। अगर समूह के पास आवश्यक दो-तिहाई बहुमत हो।’

