लोकप्रिय विषय मौसम क्रिकेट ऑपरेशन सिंदूर क्रिकेट स्पोर्ट्स बॉलीवुड जॉब - एजुकेशन बिजनेस लाइफस्टाइल देश विदेश राशिफल आध्यात्मिक अन्य
---Advertisement---

Us:ईरान समझौते को ट्रंप बता रहे जीत, लेकिन विशेषज्ञ बोले- अमेरिका की रणनीतिक हार हुई, ये आत्मसमर्पण जैसा – Us Iran Peace Deal Donald Trump Claim Victory Experts Says Strategic Defeat Surrender

[wplt_featured_caption]

---Advertisement---

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के साथ शांति समझौते के लिए अपनी पीठ थपथपा रहे हैं और ईरान की हार का दावा कर रहे हैं। ट्रंप इसे अमेरिका की बड़ी कूटनीतिक जीत भी बता रहे हैं। हालांकि व्हाइट हाउस के दावों के विपरीत अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का एक बड़ा वर्ग मानता इसे अमेरिका की जीत नहीं मानता बल्कि समझौते को अमेरिका की इस युद्ध से निकलने की कोशिश के रूप में देख रहा है। कई विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता वास्तव में अमेरिका और ट्रंप प्रशासन की रणनीतिक नाकामी को उजागर करता है।

अमेरिका की रणनीतिक हार बता रहे विशेषज्ञ

शिकागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर रॉबर्ट ए. पेप ने इस समझौते को विनाशकारी रणनीतिक पराजय करार दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर टिप्पणी करते हुए कहा कि अमेरिका एक ऐसे जाल में फंस गया, जहां युद्ध को आगे बढ़ाना भी मुश्किल था और पीछे हटना भी। विश्लेषकों के अनुसार 100 दिनों से अधिक चले संघर्ष, अरबों डॉलर के सैन्य खर्च, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर, खाड़ी क्षेत्र में समुद्री व्यापार बाधित होने और अमेरिकी जनता की बढ़ती नाराजगी के बाद वॉशिंगटन को बातचीत की मेज पर लौटना पड़ा। जबकि उसका एक भी लक्ष्य अभी तक हासिल नहीं हुआ है। 

रक्षा मंत्री ने ही खोली पोल

सीबीएस न्यूज के एक इंटरव्यू में अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दावा किया कि अमेरिका पूरे समय होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण बनाए हुए था। इस पर पत्रकार ने उनसे सवाल किया कि अगर अमेरिका का होर्मुज पर पूरा नियंत्रण था, तो जलडमरूमध्य को फिर से खोलना बातचीत का इतना बड़ा मुद्दा क्यों बना रहा? इस पर हेगसेथ जवाब नहीं दे सके, जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना शुरू हो गई। यूजर्स ने कहा कि इस बातचीत से अमेरिकी प्रशासन के दावों और असल स्थिति के बीच के विरोधाभास को उजागर करती है। 

ईरान पड़ा भारी

मध्य-पूर्व मामलों के विशेषज्ञ और अनुभवी वार्ताकार एरन डेविड मिलर का कहना है कि पूरे संघर्ष के दौरान ईरान के पास महत्वपूर्ण रणनीतिक बढ़त बनी रही। उनके मुताबिक, क्षेत्रीय सहयोगी समूहों, प्रॉक्सी नेटवर्क और होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए ईरान की वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित करने की क्षमता ने तेहरान को मजबूत सौदेबाजी की स्थिति में रखा। डेमोक्रेटिक सांसद सेथ मौल्टन ने समझौते को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, ‘यह बेहद खराब समझौता है। यह डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ईरान के सर्वोच्च नेता के सामने आत्मसमर्पण का दस्तावेज जैसा है।’

समझौते के मसौदे में क्या है?

रिपोर्टों के मुताबिक, समझौते के तहत ईरान पर लगे कुछ प्रतिबंधों में राहत देने, तेल निर्यात पर प्रतिबंधों को आंशिक रूप से हटाने और पुनर्निर्माण एवं निवेश से जुड़े बड़े आर्थिक पैकेज पर चर्चा की बात सामने आई है। परमाणु कार्यक्रम से जुड़े कई अहम मुद्दों पर अंतिम सहमति नहीं बनी है और इन्हें अगले 60 दिनों की बातचीत के लिए टाल दिया गया है, जिसे आगे भी बढ़ाया जा सकता है।

ट्रंप के लिए मध्यावधि चुनाव बड़ी चुनौती

अमेरिका में नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव भी ट्रंप प्रशासन की चिंता बढ़ा रहे हैं। युद्ध के कारण बढ़ती ईंधन कीमतें और आर्थिक दबाव राजनीतिक रूप से प्रशासन को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ऐसे में समझौते का समय बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 

क्या टिक पाएगा यह समझौता?

विशेषज्ञों का मानना है कि समझौते की सफलता अभी तय नहीं है। एरन डेविड मिलर ने चेतावनी दी है कि लेबनान और हिजबुल्लाह से जुड़े तनाव इस संघर्षविराम की पहली बड़ी परीक्षा साबित हो सकते हैं। इस्राइल पहले ही समझौते में शामिल नहीं होने की बात कह चुका है। इस्राइल में भी इस समझौते को लेकर आलोचना हो रही है। वरिष्ठ पत्रकार गिडियन लेवी ने इसे इस्राइल और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की व्यक्तिगत हार बताया है।

जीत या मजबूरी?

ट्रंप प्रशासन इस समझौते को क्षेत्रीय युद्ध रोकने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नियंत्रित करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि बता रहा है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ा वर्ग इसे ऐसे समझौते के रूप में देख रहा है, जिसमें ईरान यह दावा कर सकता है कि उसने अमेरिका के दबाव के सामने झुकने से इनकार किया। यही वजह है कि ट्रंप की जीत की घोषणा के बावजूद वैश्विक बहस में यह सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या यह वास्तव में अमेरिकी सफलता है या फिर एक महंगे और विवादित युद्ध से निकलने का रास्ता।

 

Source link

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

और पढ़ें

भारतीय पेशेवरों पर संकट:अमेरिका में नौकरी गई तो 60 दिन की राहत हो सकती है खत्म, प्रस्ताव की समीक्षा पूरी – Donald-trump-us-administration-clears-plan-to-scrap-h1b-60-day-grace-period-indian-workers

Pakistan:इमरान खान के बेटों के इंटरव्यू से क्यों मचा बवाल? सरफराज ने पाकिस्तान बोर्ड के विवाद से किया किनारा – Sarfaraz Ahmed Denies Pakistan Players Knew Of Reported England Tour Boycott Threat Over Imran Khan Interview

हरियाणवी सिंगर का कत्ल:’चुप हूं, इसका मतलब यह नहीं कि…’, इसलिए तो न लिखी अंकित की हत्या की पटकथा; दो पकड़े – Haryanvi Singer Ankit Murder In Shamli I Am Silent But That Doesnt Mean I Am At Fault Police Nab Two Shooters

अमेरिका पहुंचीं वित्त मंत्री सीतारमण:जी-20 बैठक से निवेशकों तक पर होगी नजर, छह दिन के दौरे में और क्या-क्या? – Finance Minister Sitharaman Arrives In The Us G-20 Meeting To Investor Outreach What Agenda Six-day Visit

सितंबर मध्य में विशेष सत्र संभव:कैबिनेट विस्तार के बाद परिसीमन पर होगा फैसला; पीएम के लौटने के बाद होगा मंथन? – September Mid Special Session Delimitation Cabinet Expansion Pm Modi Central Asia Tour

जम्मू-कश्मीर:तुर्किये से नजदीकी बढ़ा आतंकियों की फौज बना रहा पाकिस्तान, नवंबर-दिसंबर में बड़ी साजिश के इनपुट – Pakistan Is Building An Army Of Terrorists By Strengthening Ties With Turkey

Leave a Comment