फ्रांस के खूबसूरत शहर एवियन-लेस-बैंस में चल रहे 52वें जी7 शिखर सम्मेलन से एक बेहद महत्वपूर्ण तस्वीर सामने आई है। इस वैश्विक मंच पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच गर्मजोशी से भरी बातचीत देखी गई है। फरवरी 2025 में डोनाल्ड ट्रंप की व्हाइट हाउस में दोबारा वापसी हुई थी। उसके बाद से, पिछले 16 महीनों में दोनों नेताओं के बीच यह पहली आमने-सामने की मुलाकात है। इस बातचीत की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं। पूरी दुनिया की नजरें इन दोनों वैश्विक महाशक्तियों के शीर्ष नेताओं की जुगलबंदी पर टिकी हुई हैं।

व्यापारिक समझौतों की पृष्ठभूमि
इस मुलाकात के पीछे दोनों देशों के गहरे रणनीतिक और आर्थिक हित छुपे हुए हैं। समिट के इतर दोनों नेताओं के बीच एक महत्वाकांक्षी द्विपक्षीय व्यापार समझौते का खाका तैयार है। यह एक ऐसा एजेंडा है जिस पर पिछले कई महीनों से लगातार काम चल रहा है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने पहले ही यह साफ कर दिया है कि इस शिखर सम्मेलन के दौरान किसी अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए जाएंगे। इसके बावजूद, लंबे समय बाद हुई यह मुलाकात दोनों नेताओं को व्यापारिक ढांचे की समीक्षा करने और पुरानी तकनीकी बाधाओं को समझने का एक बड़ा मौका दे रही है।
यह भी पढ़ें: पाकिस्तान से पंजाब और फिर दिल्ली तक: ISI आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़, बड़े हमले की साजिश नाकाम; सात गिरफ्तार
समुद्री सुरक्षा की गंभीर चुनौतियां
यह मुलाकात एक बेहद संवेदनशील और जटिल भू-राजनीतिक माहौल के बीच हो रही है। इस समय पश्चिम एशिया में भारी तनाव की स्थिति बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका की ओर से लागू की गई नाकेबंदी ने भारत के वाणिज्यिक हितों को सीधे तौर पर प्रभावित किया है। हाल ही में भारतीय चालक दल के सदस्यों वाले तेल टैंकरों पर हमले भी हुए हैं। ऐसे में इस शिखर सम्मेलन ने भारत को एक सीधा और मजबूत मंच दिया है। इसके जरिए भारत समुद्री सुरक्षा से जुड़ी अपनी चिंताओं को सीधे अमेरिका के सामने रख सकता है।
वैश्विक मंच पर रणनीतिक साझेदारी
इस जी7 शिखर सम्मेलन का मुख्य फोकस वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला, अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता और स्वच्छ ऊर्जा जैसे विषयों पर केंद्रित है। लेकिन इस महामंच पर पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की आपसी केमिस्ट्री ने सबका ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यह बातचीत दर्शाती है कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी कितनी गहरी है। दोनों देश आर्थिक मोर्चे पर एक-दूसरे के करीब आ रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ वे तात्कालिक भू-राजनीतिक घर्षण बिंदुओं और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने का रास्ता भी तलाश रहे हैं।
