अमेरिका-ईरान में समझौते के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही सामान्य होने से भारत जैसे दुनिया के बड़े कच्चे तेल आयातक देश को बड़ी राहत मिल सकती है। इससे न सिर्फ तेल आपूर्ति की चिंताएं कम होंगी, बल्कि मालभाड़ा और बीमा लागत भी घटेगी। आम आदमी से लेकर कंपनियों तक को लगातार बढ़ती महंगाई से भी बड़ी राहत मिलेगी।

सऊदी अरब, इराक, कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) एवं कतर इसी मार्ग से कच्चा तेल निर्यात करते हैं। यही देश भारत के प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता भी हैं। अगर सबकुछ सामान्य हो जाता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल, गैस, खाद और अन्य कमोडिटी की कीमतों में तेज गिरावट आएगी। भारत को ये सभी उत्पाद सस्ते दाम पर उपलब्ध होंगे, जिससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी। पिछले कुछ महीनों से महंगाई से जूझ रहे देश को राहत मिलेगी। व्यापार के लिए भी माहौल बेहतर होगा।
होर्मुज से भारत का पहला जहाज निकला
समझौते के बाद सोमवार को होर्मुज से गुजरने वाले शुरुआती जहाजों में भारत की कंपनी पेट्रोनेट का चार्टर्ड एलएनजी टैंकर भी शामिल था। इसमें 62,370 मीट्रिक टन एलएनजी है। यह 18 जून को गुजरात के दाहेज बंदरगाह पहुंचेगा।
कच्चे तेल की कीमतों में पांच फीसदी की गिरावट
समझौते की घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब पांच फीसदी की गिरावट आई है, जो युद्ध के दौरान 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थीं। इससे पेट्रोल-डीजल की उत्पादन लागत बढ़ी और सरकारी तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा। हालांकि, विधानसभा चुनाव के बाद पेट्रोल व डीजल के दाम में करीब 7.50 रुपये प्रति लीटर और सीएनजी में 6 रुपये प्रति किलोग्राम की बढ़ोतरी की गई।
कीमतों में स्थिरता की उम्मीद
एलपीजी सिलिंडर भी दो चरणों में 89 रुपये महंगा हुआ। इस वृद्धि के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों को अब भी रोज करीब 650 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। विश्लेषकों का कहना है, होर्मुज खुलने से यह नुकसान धीरे-धीरे कम हो सकता है।
शेयर बाजार की धारणा में सुधार
ईरान युद्ध ने वैश्विक एवं भारतीय शेयर बाजारों को लेकर निवेशकों की धारणा बिगाड़ दी। युद्ध के बाद से भारतीय शेयर बाजारों में लगातार गिरावट दर्ज की गई। विदेशी निवेशक लगातार बिकवाल बने रहे। फरवरी को छोड़कर उन्होंने हर महीने बिकवाली की है और जून के पहले पखवाड़े में 62,000 करोड़ रुपये निकाले हैं। हालांकि, समझौते की घोषणा से सोमवार को भारतीय शेयर बाजार करीब एक फीसदी उछल गए। विदेशी निवेशकों की फिर वापसी की उम्मीद भी बढ़ गई।
आयात बिल घटेगा, मजबूत होगा रुपया
कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट से भारत के आयात बिल में कमी आएगी। डॉलर के मुकाबले लगातार टूट रहे रुपये को मजबूती मिलेगी। चालू खाते के घाटे में कमी आएगी। महंगाई घटेगी, कीमतें स्थिर होंगी। भारतीय रिफाइनरियों को कम मालभाड़े और बीमा लागत का लाभ मिलेगा।
विनिर्माण को मिलेगी रफ्तार
ईंधन सस्ता होने से परिवहन लागत में कमी आएगी, जिससे युद्ध के कारण सुस्त पड़े विनिर्माण क्षेत्र की गति बढ़ाने में मदद मिलेगी। विमानन, उर्वरक, पेट्रोकेमिकल, मालढुलाई और लॉजिस्टिक्स जैसे ऊर्जा निर्भर क्षेत्रों को सबसे अधिक लाभ मिलेगा। सरकार को ऊर्जा प्रबंधन और राजकोषीय अनुशासन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी।
होर्मुज में 13 भारतीय जहाज अब भी फंसे
भारत के 13 जहाज होर्मुज जलमार्ग की नाकेबंदी के कारण अब भी फारस की खाड़ी में फंसे हैं। बंदरगाह, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के निदेशक ओपेश शर्मा ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, जैसे ही होर्मुज जलमार्ग पूरी तरह खुलता है और नौवहन के लिए सुरक्षित माना जाता है, सरकार फंसे भारतीय जहाजों को वापस लाने के लिए तैयार है। गौरतलब है कि नाकाबंदी के दौरान अमेरिकी नौसेना ने भारतीय चालक दल वाले तीन जहाजों को निशाना बनाया था, जिसमें तीन भारतीयों की मौत हो गई थी।

