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80-90s के खतरनाक विलेन, जो हीरोज पर पड़ जाते थे भारी, एक की हुई थीं दर्दनाक मौत

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80 से 90 के दशक की फिल्मों की बात ही अलग होती थी. जहां हीरोज की बहादुरी और उनके एक्शंस खूब पसंद किए जाते थे, वहीं विलेन भी कम नहीं थे. कई बार तो विलेन का किरदार हीरोज से ज्यादा शानदार लगता था और एक्शन सीन्स में हीरोज भी विलेन के सामने फीके लगने लगते थे. इसी बीच आइए उस समय के 3 खतरनाक विलेन के बारे में जानते हैं, जो दुनिया को अलविदा कह चुके हैं. लेकिन उनके किरदार ने उन्हें दर्शकों के दिलों में अमर बना दिया है. 
 
टॉम ऑल्टर

दिग्गज एक्टर टॉम ऑल्टर का जन्म 22 जून 1950 को मसूरी, उत्तराखंड में हुआ था. उन्होंने अपनी पढ़ाई मसूरी के वुडस्टॉक स्कूल से की. हालांकि बाद में उच्च शिक्षा के लिए अमेरिका के येल यूनिवर्सिटी चले गए. भले ही वो अमेरिका में पढ़े, लेकिन उनकी हिंदी और उर्दू बहुत शानदार थी. पढ़ाई पूरी करने के बाद वो इंडिया लौट आए और पुणे के फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से एक्टिंग का कोर्स किया और गोल्ड मेडल भी जीता.

80-90s के खतरनाक विलेन, जो हीरोज पर पड़ जाते थे भारी, एक की हुई थीं दर्दनाक मौत

थिएटर से उन्हें बहुत प्यार था इसीलिए उन्होंने नसीरुद्दीन शाह और बेंजामिन गिलानी के साथ ‘मोटले’ नामक थिएटर ग्रुप की स्थापना की. उन्होंने अपने करियर में 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. इसके अलावा टीवी शो ‘शक्तिमान’ में भी महागुरु की भूमिका निभाई. साथ ही उन्होंने कई किताबें लिखीं और शानदार स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट में से एक थे. उनकी पॉपुलर फिल्मों में शतरंज के खिलाड़ी (1977), गांधी (1982), आशिकी (1990), वीर-जारा (2004), क्रांति (1981) और परिंदा (1989) शामिल हैं. हालांकि स्किन कैंसर की वजह से उन्होंने अपने घर पर अंतिम सास ली और 29 सितंबर 2017 को 67 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कह दिया. 

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गैविन पैकर्ड

8 जून 1964 को जन्मे गैविन पैकर्ड एक आयरिश-अमेरिकी, लेकिन भारतीय थे. उनके लुक्स और बॉडी की वजह से उन्हें खलनायक की भूमिका में देखा जाता था. अभिनय से पहले वो एक कंप्यूटर एक्सपर्ट और अमेरिका के सैनिक थे. साथ ही एक नेशनल और स्टेट लेवल के बॉडी बिल्डर थे और संजय दत्त, सुनील शेट्टी और सलमान खान के बॉडीगार्ड शेरा के फिटनेस ट्रेनर थे. उनकी मां कोंकणी मराठी थी और उन्होंने अपनी पढ़ाई मुंबई में की. उन्होंने अपने करियर की शुरूआत 1986 की ‘काला धंधा गोरे लोग’ से डांसर के रूप में की थी.

80-90s के खतरनाक विलेन, जो हीरोज पर पड़ जाते थे भारी, एक की हुई थीं दर्दनाक मौत

इसके बाद उन्होंने 1988 में मलयालम इंडस्ट्री में एंट्री ली और करीब 15 सालों में 60 फिल्मों में भूमिका निभाई, जिसमें करण अर्जुन (1995), सड़क (1991), मोहरा (1994), तड़ीपार (1993), चमत्कार (1992), इलाका (1989) और ये है जलवा (2002) शामिल थी. हालांकि उन्हें सांस की बीमारी थी, जिससे 18 मई 2012 को उनका निधन हो गया. 

बॉब क्रिस्टो

1938 में सिडनी, ऑस्ट्रेलिया में जन्मे बॉब क्रिस्टो ने खलनायक की भूमिका से प्रसिद्धि पाई थीं. उनका असली नाम रॉबर्ट जॉन क्रिस्टो था और उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की थीं. हालांकि किस्मत को कुछ और ही मंजूर थी और वो अपने करियर में 200 से ज्यादा स्मगलर और डॉन के किरदार में नजर आए. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें परवीन बाबी बहुत पसंद थी, इसीलिए उन्होंने अपनी जॉब छोड़ दी और इंडिया आ गए. उन्होंने 1980 में संजय खान की ‘अब्दुल्ला’ फिल्म से करियर की शुरुआत की, लेकिन 20s के समय उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली.

Bob Christo - IMDb

इसके बाद वो योग टीचर के रूप में काम करने लगे. उन्होंने नमक हलाल (1982), मिस्टर इंडिया (1987), कालिया (1981), मर्द (1985), अग्निपथ (1990) और तूफान (1989) जैसी फिल्मों में शानदार अभिनय किया. लेकिन 20 मार्च 2011 को बेंगलुरु, कर्नाटक में उन्होंने अंतिम सांस ली. डॉक्टर्स के मुताबिक, वेंट्रिकुलर वाल्व फटने और दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हुई. 

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