अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला दावा किया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर घोषणा की है कि ईरान के साथ एक नया और ऐतिहासिक समझौता होने जा रहा है। इस डील पर कल ही हस्ताक्षर किए जाएंगे। ट्रंप का दावा है कि इस नए समझौते के तुरंत बाद रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी के लिए पूरी तरह खोल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में ईरान के साथ अमेरिका के संबंध पिछली सरकारों की तुलना में बहुत अलग और काफी बेहतर हो चुके हैं।
ओबामा प्रशासन पर निशाना
ट्रंप ने अपने बयान में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में हुए साल 2015 के परमाणु समझौते (जेसीपीओए) पर निशाना साधा है। उन्होंने दावा किया कि ओबामा की वह डील ईरान के लिए परमाणु हथियार हासिल करने का एक बेहद आसान, खूबसूरत और सुगम रास्ता थी।
उनका कहना है कि अगर वह समझौता लागू रहता, तो ईरान के पास छह साल पहले ही परमाणु बम आ गया होता। ईरान अब तक उसका इस्तेमाल भी कर चुका होता। ट्रंप ने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों ने ईरान को सैकड़ों अरब डॉलर का भुगतान किया। इसमें 1.7 अरब डॉलर यानी 16,202.32 करोड़ रुपये की नकद राशि भी शामिल थी, जो सीधे कैश के रूप में दी गई।
यह भी पढ़ें: West Asia Crisis: पाकिस्तानी PM शरीफ का दावा- 24 घंटे में US-ईरान शांति समझौता संभव; ट्रंप-अराघची का रुख क्या?
नई डील का ब्लूप्रिंट
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उनका नया समझौता ओबामा की डील के बिल्कुल विपरीत है। यह ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए एक अभेद्य दीवार की तरह काम करेगा। उनका दावा है कि अब ईरान परमाणु हथियार नहीं चाहता है। इस समझौते के बाद वे किसी भी कीमत पर, चाहे खरीद के जरिए हो, विकास के जरिए या किसी अन्य माध्यम से, परमाणु हथियार हासिल नहीं कर पाएंगे। सबसे बड़ी बात यह है कि इस पूरी डील में पिछली सरकार की तरह किसी भी तरह के धन का लेनदेन नहीं होगा।
बी-2 बॉम्बर्स और न्यूक्लियर डस्ट का प्लान
भविष्य की रणनीति साझा करते हुए ट्रंप ने कहा कि जब स्थितियां पूरी तरह शांत हो जाएंगी, तब अमेरिकी सेना अपने खूबसूरत बी-2 बॉम्बर्स और शानदार पायलटों की मदद से ईरान के मजबूत ग्रेनाइट पहाड़ों के नीचे गहराई में दबे ‘न्यूक्लियर डस्ट’ को बाहर निकालेगी।
इस परमाणु सामग्री को डाउनब्लेंड करके पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा। यह प्रक्रिया ईरान या अमेरिका, कहीं भी पूरी की जा सकती है। ट्रंप ने उम्मीद जताई कि यह पूरी प्रक्रिया बेहद तेजी से, आसानी से और सुगमता से पूरी होगी। हालांकि, उन्होंने यह चेतावनी भी दी कि अगर यह काम नहीं कर पाया, तो अमेरिका के पास अंतिम विकल्प हमेशा मौजूद है।

