पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (POK) के रावलकोट में प्रदर्शनकारियों पर पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स ताबड़तोड़ फायरिंग कर रहे हैं. पाकिस्तानी हुकमूत द्वारा POK में इंटरनेट पर बैन लगाने और 53 लोगों को गोली मारने के बाद भी विरोध प्रदर्शन खत्म नहीं हो रहा है. ये प्रदर्शन रोजाना बढ़ता जा रहा है. बता दें कि गोलीबारी के बावजूद रावलकोट में हजारों प्रदर्शनकारी मौजूद हैं, जो पाकिस्तानी सेना का सामना कर रहे हैं.
प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर को साफ चेतावनी दे दी है कि अब ये धरना खत्म नहीं होगा और धरना तभी खत्म होगा, जब पाकिस्तानी फ़ौज या तो उन्हें मार देगी या फिर प्रदर्शनकारी पाकिस्तानी फ़ौज को खत्म कर देंगे.
स्थानीय सूत्रों के मुताबिक रावलकोट के ईदगाह मैदान में बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए थे. इसी दौरान सुरक्षा बलों ने भीड़ पर गोलीबारी कर दी. फायरिंग के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया.
क्यों हो रहे हैं प्रदर्शन
बता दें कि POK में पिछले कई दिनों से सस्ती बिजली, सब्सिडी वाला गेहूं-चावल और अपने अधिकारों की मांग को लेकर आंदोलन चल रहा है. हाल ही में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद तनाव और ज्यादा बढ़ गया है. प्रशासन ने कई गिरफ्तारियां की हैं और कुछ क्षेत्रों में इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं.

क्या बोले सरदार अमान ख़ान
प्रदर्शन के प्रमुख आयोजकों में से एक सरदार अमान ख़ान ने मंच से कहा कि पाकिस्तान की फ़ौज का इतिहास है पीओके के कश्मीरियों को मारने का. 1956 में इन्होंने कत्लेआम किया था, 1990 और 1992 में किया था और अभी भी कर रहे है लेकिन पीओके के कश्मीरी पीठ नहीं दिखायेंगे और सीने पर गोली खाएंगे.
भारत ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए इसे नरसंहार बताया है और कहा है कि यह पाकिस्तान के कब्जे वाले क्षेत्रों में लोगों के अधिकारों के दमन को दर्शाता है. भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मामले का संज्ञान लेने और पाकिस्तान से लोगों के अधिकारों का सम्मान करने की अपील की है.
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