देश और प्रदेश में इस वर्ष जून से सितंबर के दौरान सामान्य से 10 फीसदी कम बारिश के आसार हैं। इसके बावजूद कहीं सूखा पड़ने की स्थिति नहीं होगी। यह कहना है भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक और विश्व मौसम विज्ञान संगठन में भारत के स्थायी प्रतिनिधि डॉ. मृत्युंजय महापात्रा का।
मंगलवार को अमर उजाला से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि अलनीनो की मजबूत स्थिति के कारण ही देश में आगामी मानसून सीजन में सामान्य की तुलना में 90 फीसदी ही बारिश देखने को मिल सकती है। वर्ष 2015 और 2023 में भी अलनीनो की मजबूत स्थिति बनी थी जिससे देश में सामान्य से 10 से 14 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई थी। जून में अलनीनो के सक्रिय होने की संभावना 82 प्रतिशत तक पहुंच सकती है जबकि जुलाई और अगस्त में अलनीनो प्रभाव 90 प्रतिशत से अधिक रहने के आसार हैं। सामान्यतः अलनीनो के कारण भारतीय मानसून कमजोर पड़ता है और वर्षा में कमी आती है।
भारत के मानसून पर असर डालता है अलनीनो
डॉ. महापात्रा के अनुसार, अलनीनो प्रशांत महासागर में होने वाली एक मौसमी जलवायु घटना है, जिसका भारत के मानसून पर सीधा असर पड़ता है। इसके असर से मानसूनी हवाएं कमजोर हो जाती हैं और नमी लेकर आने वाली हवाओं का सामान्य प्रवाह बाधित हो जाता है। इससे देश के कई हिस्सों, खासकर उत्तर-पश्चिम और मध्य भारत में सामान्य से कम वर्षा होती है।


