Tax Payers: आमतौर पर इनकम टैक्स रिटर्न भरने की हड़बड़ी के दौरान कुछ गलतियों की वजह से न केवल आपका रिफंड नामंजूर हो जाता हैं, बल्कि नोटिस और जुर्माना लगने की संभावना बन सकती हैं. अगर आप समय सीमा से चूक जाते हैं तो आपको इनकम टैक्स एक्ट की धारा 234F के तहत लेट फाइलिंग चार्ज देना होगा.
टैक्सपेयर की इनकम और फाइलिंग में हुई देरी के मुताबिक यह जुर्माना 5000 रुपए तक हो सकता है. अगर कुल इनकम 5 लाख रुपए से कम है, तो लेट फाइलिंग का अधिकतम जुर्माना 1000 रुपए है, और अगर कुल इनकम 5 लाख रुपए से ज़्यादा है, तो यह जुर्माना 5000 रुपए है.
क्या ज़ीरो टैक्स लायबिलिटी के बावजूद जुर्माना लगेगा?
सबसे जरूरी बात यह कि अगर किसी सैलरी पाने वाले व्यक्ति को 31 जुलाई, 2026 तक ITR फाइल करना है और वह समय सीमा चूक जाता है, तो भी वह 31 दिसंबर, 2026 तक ‘बिलेटेड रिटर्न’ (देरी से भरा जाने वाला रिटर्न) जमा कर सकता है. हालांकि, उन्हें लेट फाइलिंग फीस देनी पड़ सकती है. यह नियम तब भी लागू होता है जब टैक्स विभाग की ओर से दी गई छूट या रिबेट की वजह उनकी टैक्स देनदारी शून्य हो.
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ऐसे में सिर्फ़ उन्हीं लोगों को ITR फ़ाइल करने की ज़रूरत नहीं है जिनकी आय छूट की सीमा से कम है. पुरानी टैक्स व्यवस्था में यह बेसिक लिमिट 2.5 लाख रुपए है, जबकि नई व्यवस्था में यह 4 लाख रुपए है.
मिसाल के तौर पर टैक्सपेयर ने फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में 9 लाख रुपए कमाए और उसे 31 जुलाई, 2026 तक रिटर्न फाइल करना था. अगर वह नवंबर 2026 में रिटर्न फाइल करता है, तो भी वह ऐसा कर सकता है, लेकिन उसे 5,000 रुपए की लेट फाइलिंग फीस देनी होगी. पेनल्टी के अलावा, अगर तय तारीख के बाद भी कोई टैक्स बकाया रहता है, तो टैक्सपेयर को उस पर ब्याज भी देना पड़ सकता है.
FY26 के लिए ITR की समय-सीमा
दरअसल, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने टैक्सपेयर के मुताबिक अलग-अलग डेडलाइन तय की हैं. सैलरी पाने वाले लोगों और ITR-1 या ITR-2 भरने वालों को 31 जुलाई तक अपना रिटर्न फाइल करना होगा. जिन टैक्सपेयर्स को टैक्स ऑडिट की ज़रूरत नहीं है और जो ITR-3 या ITR-4 भरते हैं, उनके पास 31 अगस्त तक का समय है. जिन लोगों के खाते का टैक्स ऑडिट होना ज़रूरी है, उन्हें 31 अक्टूबर तक रिटर्न फाइल करना होगा.
ट्रांसफर प्राइसिंग नियमों के दायरे में आने वाले टैक्सपेयर्स के लिए डेडलाइन 30 नवंबर तय की गई है. अगर कोई टैक्सपेयर तय डेडलाइन तक रिटर्न फाइल नहीं कर पाता है, तो भी वह 31 दिसंबर तक ‘बिलेटेड रिटर्न’ (देरी से भरा गया रिटर्न) फाइल कर सकता है. आमतौर पर 31 मार्च, 2027 तक ‘रिवाइज्ड रिटर्न’ के ज़रिए रिटर्न में सुधार भी किया जा सकता है.
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