विधान परिषद् चुनाव के लिए अब तक तीन राजनीतिक दलों ने अपने उम्मीदवारों ने नामों की घोषणा कर दी है। 10 में से नौ सीट पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की ओर से उम्मीदवार उतार दिए गए हैं। इसमें चार-चार भाजपा और जदयू और एक सीट पर लोजपा (राम) ने उम्मीदवार उतार दिया है। एक सीट पर दोनों दलों के उम्मीदवार उतारने की तैयारी है। संख्या बल के हिसाब से राजद एक सीट पर उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर चुका है। अब तक राजद की ओर से एक पद के लिए उम्मीदवारों की घोषणा नहीं की गई है। विचार विमर्श ही चल रहा है। उम्मीदवार राजद के कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव को फाइनल करना है। यही चीज उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गई है। इधर, बिहार सरकार में मंत्री दीपक प्रकाश को विधान परिषद् भेजने के मामले में भी पेंच फंस गया है।
आज संभावना है कि दिल्ली से राष्ट्रीय जनता दल के सुप्रीमो आएंगे। इसके बाद उनकी अंतिम स्वीकृति के बाद तेजस्वी यादव उम्मीदवार की घोषणा कर दें। सूत्रों की मानें तो तेजस्वी यादव दलित वोट बैंक को लुभाने की कोशिश में हैं। इसलिए वह शिवचंद्र राम को विधान परिषद् भेजना चाहते हैं लेकिन उनकी मां और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी तेज प्रताप यादव को एमएलसी बनाना चाहती हैं। शनिवार शाम तेज प्रताप यादव राबड़ी देवी से मिलने भी गए थे। हालांकि, तब उन्होंने कारण राबड़ी देवी की तबीयत का खराब होना बताया था। इधर, राजद नेताओं का स्पष्ट कहना है कि तेज प्रताप यादव अब राजद में नहीं है। वह किसी दूसरे राजनीतिक दल में हैं। इसलिए राजद कार्यकर्ता को ही विधान परिषद् भेजा जाएगा।
ओवैसी की पार्टी ने तेजस्वी से क्या मांग की?
इधर, असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने राज्यसभा चुनाव में मदद के बदले नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से एक एमएलसी सीट की मांग कर दी है। एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष और विधायक अख्तरुल ईमान ने साफ तौर पर कहा कि पिछले राज्यसभा चुनाव में उनकी पार्टी ने महागठबंधन का समर्थन किया था। उन्होंने दावा किया कि उस समय तेजस्वी यादव ने वादा किया था कि भविष्य में वह एआईएमआईएम के हितों का ख्याल रखेंगे। विधायक अख्तरुल ईमान ने कहा कि अब समय आ गया है कि तेजस्वी अपना वादा पूरा करें। हमारे पास अकेले दम पर सीट जीतने के लिए पर्याप्त विधायक नहीं हैं। अगर राजद भविष्य में हमारा सहयोग चाहती है, तो उसे यह सीट हमें देनी होगी।
दीपक प्रकाश का क्या होगा?
मंत्री दीपक प्रकाश ने नाम की घोषणा अब तक नहीं हुई है। भाजपा की ओर से अब तक इस मामले में प्रतिक्रिया भी नहीं आई है। अगर 10वीं सीट पर दीपक प्रकाश का नाम घोषित किया जाता है तो महागठबंधन और एनडीए में इस सीट के लिए कड़ी टक्कर हो सकती है। बिहार विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के अनुसार, एक एमएलसी सीट जीतने के लिए करीब 25 विधायकों के वोटों की आवश्यकता होती है। एनडीए के पास आठ उम्मीदवारों को आसानी से जिताने लायक संख्या बल है। उपेंद्र कुशवाहा ने स्पष्ट कहा कि यह एमएलसी चुनाव है। हमलोगों के पास कल तक का समय है। इंतजार कीजिए। बता दें कि दीपक प्रकाश बिहार सरकार में पंचायती राज मंत्री हैं, लेकिन वह किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं। नियम कहता है कि किसी भी व्यक्ति को मंत्री बनने के छह महीने के अंदर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य होता है। अब देखना है कि अगले 24 घंटे में क्या होता है?

