Movie Review
है जवानी तो इश्क होना है
कलाकार
वरुण धवन
,
मृणाल ठाकुर
,
पूजा हेगड़े
,
मनीष पॉल
,
जिमी शेरगिल
,
मौनी रॉय
और
चंकी पांडे
लेखक
यूनुस सजावल
और
फरहाद सामजी
एक दौर था जब कॉमेडी का मतलब डेविड धवन होता था। उन्होंने गोविंदा, कादर खान और जॉनी लीवर जैसे कलाकारों के साथ मिलकर हिट फिल्में दीं। कहा जाता है कि गोविंदा का तो करियर ही डेविड धवन की फिल्मों के दम पर चला है। ऐसे में जब सुनने में आया कि ‘है जवानी ताे इश्क होना है’ डेविड की आखिरी फिल्म होगी तो दर्शकों को इससे बड़ी उम्मीदें थी, पर कॉमेडी के मामले में यह फिल्म फैंसी रैपर में बेस्वाद टॉफी की तरह निकली। फिल्म कहीं-कहीं एंटरटेनिंग तो है पर कॉमेडी और पंच लाइन्स लगभग गायब हैं। सेकंड हाफ में यह आपको टुकड़ों में हंसाती है वो भी तब जब आप यह मान लेते हैं कि इसे बिना लॉजिक के ही देखना होगा। फिल्म के फर्स्ट हाफ के साथ क्या दिक्कत है? इसके बेस्वाद होने की वजह क्या है? अब जरा इस पर बात कर लेते हैं।