भारतीय सर्राफा बाजार इस समय नए संकट का सामना कर रहा है। ज्वेलरी बाजार में चांदी का बीटूबी (बीटूबी कंपनी) और बीटूसी (बिजनेस टू कंज्यूमर) व्यापार प्रभावित हो रहा है। जिसकी मुख्य वजह चांदी की शुद्धता पर उठ रहे सवाल हैं। ज्वेलर्स और डीलरों का कहना है ग्राहक जो चांदी लेकर बेचने आते हैं उसमें केवल 65 से 70 प्रतिशत ही शुद्ध चांदी होती है। मुंबई के बाजार में प्रतिदिन औसतन 1000 से 1500 किलोग्राम की चांदी बिकती है, लेकिन इसकी वजह से सौदे में कमी आ रही है औसतन 10 प्रतिशत भी नहीं हो रहे हैं। यही समस्या सिक्के, कटलरी उत्पादों और बर्तन वाले ज्वैलर्स को भी उठानी पड़ रही है।
चांदी के सिक्कों और बार में केवल 65/70 प्रतिशत ही शुद्ध चांदी
इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन के आधिकारिक प्रवक्ता और उमेदमल त्रिलोकचंद ज्वैलर्स के कुमान जैन बताते हैं, अगर ग्राहक चांदी खरीदने आते हैं, तो उन्हें किलो असली चांदी मिलेगी, लेकिन बार और सिक्को में केवल 65 से 70 प्रतिशत ही चांदी मिलती है, बाकी उत्पादों में दूसरी धातु मिलाकर, जरूरत के हिसाब से लेते हैं। इसकी वजह से इन सौदों में गिरावट आ रही है। सरकारी रोक के बाद, 30 किलोग्राम आयातित चांदी के बार से होने वाली आय न के बराबर रह गई है। अभी .999 टच (कैरेट) चांदी की कीमत बिना जीएसटी (गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स) के करीब 2.63 लाख रुपये है, वहीं बिल में बिना 3 प्रतिशत जीएसटी के 8 से 10 प्रतिशत डिस्काउंट के साथ करीब 2.5 लाख रुपये में मिल रही है।
ग्राहकों को गुमराह कर मुनाफ कमाना सही नहीं
मुंबई के मेघाजी वानेचंद बुलियन डीलर के अनिल संघवी कहते हैं, कच्चे चांदी को रिफाइनरी में पिघलाकर उससे एक किलो या उससे भी कम वजन की छड़े तैयार की जाती है और बाजार में बेची जाती हैं। जिसमें बेईमान व्यापारी 0.999 कैरेट का सिक्का छापने पर जोर देते हैं। जिसमें उपभोक्ता और व्यापारियों को किलोग्राम वजन के आधार पर गुमराह कर मुनाफ कमा सकें। देखा जाए तो कैरेट से शुद्धता को विशेष संबंध नहीं होता है। इसके बाद जब इसी चांदी को बेचा जाता है, तो यह उपभोक्ता को भारी नुकसान होता है।
भारत में बुनियादी ढांचे की कमी के कारण यह समस्या बढ़ रही है
लंदन बुलियन मर्चेंट एसोसिएशन के विश्लेषक पैनल में भारतीय प्रतिनिधि भार्गव वैद्य ने कहा, पांच साल पहले रिसाइकल चांदी में चांदी की शुद्धता 85 प्रतिशत थी, यह आज घटकर केवल 55 से 70 प्रतिशत रह गई है। इसका मतलब है कि आप शुरुआत से ही व्यापारी को भारी मुनाफा देते हैं, कीमतों में यदि 30 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि हो जाती है तब ही ग्राहक इसका फायदा होता है। वे कहते हैं, भारत में बुनियादी ढांचे की कमी के कारण यह समस्याएं और गंभीर होती जा रही हैं। भारत अपनी कुल जरूरत का 80 प्रतिशत यानी 7000 टन चांदी सालाना आयात करता है। इसके विपरित चांदी की शुद्धता को आधिकारिक रूप से सत्यापित करने के लिए भारत में केवल 286 हॉलमार्किंग केंद्र हैं। हाल ही में चांदी की औद्योगिक मांग भी काफी बढ़ गई है। आपूर्ति के अधिकांश दरवाजे बंद होने की वजह से वैश्विक बाजार में अशुद्ध चांदी 10 से 12 प्रतिशत से अधिक कीमत पर बिक रही है।
चांदी आभूषणों में हॉलमार्किंग और शुद्धता के सभी मानक अनिर्वाय करने की मांग
अनिल संघवी और कुमार जैने का कहना है कि नियामक सरकारी संगठनों को इस संबंध में तत्काल लाइसेंस जारी करने चाहिए। कीमती धातु शोधक संघ ने इस संबंध में सरकार का ध्यान इस ओर दिलाया है। हमारी यह मांग तो कई वर्षों से चली आ रही है कि, चांदी आभूषणों में हॉलमार्किंग और शुद्धता के सभी मानक वैश्विक स्तर पर भी अनिर्वाय किए जाने चाहिए। वहीं भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) को अपने नेटवर्क का विस्तार करने की जरूरत है। सोने की रिफाइनरियों की तरह चांदी की रिफाइनरियों को भी मान्य प्राप्त अनिर्वाय लाइसेंस दिए जांए और चांदी की शुद्धता जांच के लिए केंद्रों को शुरू किया जाने की आवश्यकता है।


