BS VI Trucks: दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों (NCR) में बढ़ते वायु प्रदूषण को कम करने के लिए पुराने डीजल ट्रकों और बसों (BS-IV और उससे नीचे के मॉडल) पर अब सरकार पूरी तरह से नकेल कसने जा रही है। कैबिनेट ने इस प्रदूषण को जड़ से मिटाने के लिए करीब 5,041 करोड़ रुपये के बजट वाली रिप्लेसमेंट योजना को मंजूरी दे दी है। इस योजना का सीधा असर दिल्ली-एनसीआर के साथ-साथ बाहर से आने वाले ट्रकों पर भी पड़ेगा, जिससे आने वाले समय में एनसीआर की हवा पूरी तरह बदल सकती है।


कितने वाहनों पर होगा असर?
इस योजना के तहत 1.90 लाख से अधिक ट्रकों और लगभग 16 हजार बसों को चरणबद्ध तरीके से बदला जाएगा। इसमें दिल्ली-NCR में पंजीकृत पुराने कमर्शियल वाहन शामिल होंगे।
क्यों जरूरी है यह बदलाव?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार BS-I से BS-IV श्रेणी के वाहन, BS-VI वाहनों की तुलना में लगभग 67 प्रतिशत अधिक कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) और 97 प्रतिशत तक अधिक पार्टिकुलेट मैटर (PM) उत्सर्जित करते हैं। यही वजह है कि पुराने डीजल ट्रक और बसें दिल्ली-एनसीआर के प्रदूषण स्तर को बढ़ावा देते हैं। ऐसे में सरकार का मानना है कि इन वाहनों को आधुनिक तकनीक वाले BS-VI या इलेक्ट्रिक विकल्पों से बदलने पर प्रदूषण में कमी लाई जा सकती है।
5,041 करोड़ रुपये की लागत से लागू होगी योजना
- केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार इस परियोजना पर कुल 5,041 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इस टास्क को अकेले करना मुमकिन नहीं है, इसलिए सड़क परिवहन मंत्रालय (MORTH), NCRPB के साथ मिलकर दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश (UP) और राजस्थान की राज्य सरकारें संयुक्त रूप से इसे जमीन पर उतारने की कोशिश करेंगी।
- यह योजना सही से काम कर सके, इसके लिए बाकायदा MoPNG और ऑयल मार्केटिंग कंपनी और एयरलाइंस की एक विशेष मॉनिटरिंग टीम तैयारी की गई है। साथ ही काम की प्रगति को देखने के लिए एयर लाइंस और ऑयल मार्केटिंग के बीच एक एमओयू (MoU) भी साइन किया जाएगा।
चरणबद्ध तरीके से होगा क्रियान्वयन
पुराने ट्रकों और बसों को एक साथ नहीं हटाया जाएगा। यह प्रक्रिया चरणबद्ध तरीके से लागू की जाएगी, जिससे परिवहन व्यवस्था प्रभावित न हो और ऑपरेटरों को नए वाहनों में बदलाव के लिए पर्याप्त समय मिल सके। सरकारी अनुमान के अनुसार इस परियोजना को पूरी तरह लागू होने में तीन साल से अधिक का समय लग सकता है।
आगे अन्य शहरों तक भी पहुंच सकती है योजना
सरकार का मानना है कि इस प्रोजेक्ट में तीन साल से अधिक का समय लग सकता है। अगर यह सफल रहता है तो भविष्य में देश के अन्य बड़े शहरों और प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों में भी पुराने प्रदूषणकारी वाहनों को बदलने की इसी तरह की योजनाएं लागू की जा सकती हैं।
