‘क्यूआर कोड स्कैन करो और पेमेंट हो गया’- यह वाक्य अब हर भारतीय की रोजमर्रा की जिंदगी का सबसे अहम हिस्सा बन चुका है। चाय की टपरी से लेकर बड़े शॉपिंग मॉल्स और हवाई सफर तक, हर जगह ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ यानी यूपीआई का दबदबा साफ नजर आता है। भारत के इस स्वदेशी डिजिटल पेमेंट सिस्टम ने अब एक नया और ऐतिहासिक मुकाम हासिल कर लिया है। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, यूपीआई ने अपने पिछले सभी रिकॉर्ड ध्वस्त करते हुए मई 2026 में नया इतिहास रच दिया है।
आखिर इस रिकॉर्ड-तोड़ वृद्धि के पीछे क्या कारण हैं और यह भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्या मायने रखता है? आइए सात आसान सवालों और उनके जवाबों के जरिए समझते हैं सबकुछ।
1. अभी की सबसे बड़ी और ताजा खबर क्या है?
नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) द्वारा जारी किए गए नए आंकड़ों के मुताबिक, मई महीने में यूपीआई के जरिए होने वाले लेनदेन ने वॉल्यूम (कुल संख्या) और वैल्यू (कुल रकम) दोनों ही पैमानों पर एक नया शिखर छू लिया है। मई के महीने में कुल 23.2 बिलियन (2,320 करोड़) बार यूपीआई से पेमेंट किया गया, जिनकी कुल कीमत 29.90 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई।
2. अचानक इस रिकॉर्ड-तोड़ उछाल के पीछे मुख्य वजहें क्या रही हैं?
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यह वृद्धि ठोस मांग पर आधारित है। ‘कैशफ्री पेमेंट्स’ के सह-संस्थापक और सीईओ आकाश सिन्हा के अनुसार, मई के ये शानदार आंकड़े बाजार की मजबूत और स्वाभाविक मांग को दर्शाते हैं। गर्मी की छुट्टियों के दौरान लोगों का जमकर सफर करना, आईपीएल 2026 का बुखार और इस दौरान मौसमी चीजों पर बढ़ने वाला उपभोक्ता खर्च इस भारी लेनदेन के सबसे बड़े कारण रहे हैं। उनके मुताबिक, यह महीने-दर-महीने एक शानदार रिकवरी है और यूपीआई के लगातार ऊपर जाने के ट्रेंड को दिखाती है।

