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LPG Crisis: होर्मुज से हटी नाकाबंदी तो क्या भारत में खत्म हो जाएगी गैस की किल्लत? सस्ता होगा सिलेंडर?

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  • ईरान द्वारा होर्मुज की नाकेबंदी के ऐलान के बाद अमेरिका ने ईरान पर कार्रवाई की.
  • अमेरिका का मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना है.
  • होर्मुज की नाकेबंदी हटने से भारत में गैस की किल्लत सामान्य होगी.
  • अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गैस के दाम कम होने से वाणिज्यिक सिलेंडर सस्ते हो सकते हैं.

LPG Supply in India: ईरान पर 28 फरवरी को शुरू हुए अमेरिका और इजरायल के हमलों के तुरंत बाद तेहरान ने होर्मुज (Strait of Hormuz) की नाकेबंदी का ऐलान कर दिया था. इसके बाद 13 अप्रैल को पाकिस्तान की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच हुई शांति वार्ता के विफल होने के बाद अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के खिलाफ कदम उठाया और होर्मुज नाकेबंदी लगा दी.

ऐसा करने के पीछे अमेरिका का मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाना है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कह दिया है कि जब तक ईरान परमाणु हथियार न बनाने और होर्मुज को बिना किसी टोल के पूरी तरह से मुफ्त खोलने पर राजी नहीं होता, तब तक अमेरिकी सशस्त्र बल और उनके सेंट्रल कमांड की होर्मुज पर नाकेबंदी जारी रहेगी.

नाकाबंदी हटने से क्या होगा‌?

अमेरिका और ईरान के बीच अभी 60  दिनों का युद्धविराम है, जिसके जुलाई 2026 के मध्य में खत्म होने की उम्मीद है. अगर इस बीच दोनों के बीच शांति वार्ता पर बात बन जाती है, तो होर्मुज के खुलने की भी पूरी संभावना है. होर्मुज पर नाकेबंदी हटने के साथ ही भारत में गैस की किल्लत पूरी तरह से सामान्य हो जाएगी क्योंकि सप्लाई सामान्य होगी, तो ग्लोबल मार्केट्स में LPG के दाम कम होंगे. इसका भारत पर भी असर पड़ेगा. 

भारत अपनी जरूरत की 60% से ज्यादा LPG कतर, सऊदी अरब और यूएई जैसे खाड़ी देशों से मंगाता है, जो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते ही भारत आता है. नाकाबंदी हटने से भारतीय रिफाइनरियों और बॉटलिंग प्लांटों को प्रोपेन और ब्यूटेन जैसा कच्चा माल समय पर मिलेगा.

क्या गैस सिलेंडर होगा सस्ता?

नाकाबंदी हटने के बाद जब अंतर्राष्ट्रीय बाजार में गैस के दाम थोड़े कम होंगे, तब भी तेल कंपनियां (OMCs) तुरंत गैस सिलेंडर के दाम कम नहीं करेंगे क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच जंग के चलते अंतर्राष्ट्रीय बाजार में एलपीजी की लागत काफी बढ़ चुकी है. आम जनता को महंगाई से बचाने के लिए तेल कंपनियां इस बढ़े हुए खर्च का बोझ खुद उठा रही है. इसी वजह से देश में लंबे समय से घरेलू एलपीजी की कीमतें स्थिर हैं. 

हालांकि, इससे कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 200-400 रुपये तक की गिरावट आ सकती है क्योंकि जंग के चलते इसकी कीमतें पहले ही 3000 के पार निकल चुकी हैं. 

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