नीट और सीबीएसई परीक्षाओं की अव्यवस्था इस पूरे हफ्ते चर्चा में रहीं। नीट के लीक पर विपक्ष शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांग रहा है। वहीं, दूसरी तरफ ये लीक का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जवाबदेही तय किए बिना ऐसी घटनाएं नहीं रुकेंगी। कोर्ट ने छात्रों और परिवारों की पीड़ा पर चिंता जताई। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में भी इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार राम कृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, पीयूष पंत, मिहिर रंजन और अवधेश कुमार मौजूद रहे।

अवधेश कुमार: कौन कहेगा कि बच्चों की गलती है? बच्चे तो इस देश के अपराध और पाप की सजा भुगते हैं। कल सुप्रीम कोर्ट में जो राधाकृष्णन साहब थे जो उच्चाधिकार प्राप्त समिति थी वह पेश हुए कि आपने परीक्षा के सुधार के लिए क्या उपाय बताए थे? उन्होंने कहा कि हमने 60 अल्पकालिक और 35 दीर्घकालिक हमने सुझाव दिए थे और वो एफिडेविट दिया है उन्होंने कि सरकार ने सभी सिफारिशें मान ली थी। अब आप बताइए पिछली बार जब 2024 में हुआ फिर एक कमेटी बनी कमेटी ने जो सिफारिश किया अगर वो सभी मान ली गई इसके बावजूद हो रहा है। यह तो फिर सीरियस बात है। सरकारें बदल गई फिर भी अगर हो रहा है तो एक बड़ा इशू है। दूसरी बात यह है कि देखिए इस मशीनरी से भी टॉप के टॉप विद्यार्थी निकले हैं, दुनिया में बहुत अच्छा कर रहे हैं। इसलिए सब कुछ नष्ट हुआ है यह भी हमको नहीं मानना है। देखिए परीक्षा प्रणाली में कोई भी परीक्षा प्रणाली संपूर्ण रूप से दोष रहित हो यह मैं नहीं मानता हूं। मूल बात व्यक्ति पर आ रही है। उसका क्या उपाय है कि जिसको आप एक्सपर्ट बनाते हैं, वही क्वेश्चन आउट करने लग रहा है?
