तो इसलिए हुई गिरिबाला की गिरफ्तारी:त्विषा के शरीर पर चोट, Cctv से छेड़छाड़, साक्ष्य प्रभावित होना बना आधार – The Story Behind The Arrest Of Twisha Sharma’s Mother-in-law, These Were The Main Reasons
हाईप्रोफाइल त्विषा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में सेवानिवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश व जिला उपभोक्ता फोरम की अध्यक्ष गिरिबाला सिंह को आखिरकार गुरूवार को लंबी पूछताछ के बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने गिरफ्तार कर लिया है। गिरिबाला सिंह के बेटे अधिवक्ता समर्थ सिंह पत्नी त्विषा शर्मा केस में दहेज हत्या के मामले में पहले से ही 29 मई तक सीबीआई की रिमांड पर हैं। बुधवार देर रात जबलपुर उच्च न्यायालय ने गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी। जिन बिंदुओं के आधार पर गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हुई है, उन्हीं बिंदुओं के आधार पर सीबीआई ने उन्हें गिरफ्तार किया है। आइए जानते हैं किन बिंदुओं को लेकर अपराधियों को फैसल सुनाने वाली 36 साल तक न्यायिक सेवा की अधिकारी रहीं गिरिबाला सिंह गिरफ्तार हुई हैं।
त्विषा शर्मा के शरीर पर चोट के निशान व दहेज की मांग
त्विषा शर्मा की दोबारा दिल्ली एम्स की टीम द्वारा किए गए पीएम की रिपोर्ट अभी सीबीआई को नहीं मिली है, लेकिन भोपाल एम्स के डॉक्टरों द्वारा 13 मई की सुबह किए गए पीएम रिपोर्ट में आधा दर्जन स्थानों पर चोट के निशान त्विषा शर्मा के शरीर पर मिले थे। त्विषा के सिर में क्लॉटिंग, शरीर में कई स्थानों पर मारपीट के निशान, गले में दो निशान, संघर्ष के निशान मिलने के कारण गिरिबाला सिंह भी शक के दायरे में आईं हैं। दहेज मांगने का आरोप भी गिरिबाला सिंह पर हैं। उन्होंने कहा कि मैंने बहू को सात लाख दिए हैं, जिसे उच्च न्यायालय ने कहा कि बहू को राशि देने का यह मतलब नहीं होता कि दहेज की मांग नहीं की गई है। परिजनों ने दहेज की मांग के साथ त्विषा शर्मा के म्युचुअल फंड के 20 लाख भी समर्थ द्वारा अपने खाते में ट्रांसफर करने का दबाव बनाया जा रहा था।
वॉट्सएप चैट में प्रताड़ना, ऑडियो में चरित्र पर लांछन लगाने की पुष्टि
त्विषा शर्मा ने अपने परिजनों को फोन पर उसके साथ होने वाली प्रताड़ना की बात तो बताई ही जा रही थी। वह अपने भाई, मां, बहन, सहेली और पिता को वॉट्सएप पर आए दिन दिए जाने वाले तानों, बात-बात पर मारपीट, टॉर्चर, मानसिक व शारीरिक प्रताड़ना और त्रासदी देने की बात साबित हो रही है। त्विषा के गर्भवती होने के बाद जब विवाद बढ़ा तो उसके भाई मेजर हर्षित शर्मा भी माता-पिता के साथ गिरिबाला सिंह के घर पहुंचकर मामले को सुलझाने जब बातचीत की गई तो गिरिबाला सिंह ने त्विषा के चरित्र पर लांछन लगाया। शादी से पहले की जिंदगी को लेकर ऐसे सवाल किए, जो पूर्वाग्रह से प्रेरित लगे। यह ऑडियो भी जांच में शामिल है और इससे भी माना गया कि गिरिबाला सिंह और समर्थ सिंह का त्विषा के प्रति व्यवहार बहुत खराब था।
साक्ष्यों से छेड़छाड़ व प्रभावित करने की का आरोप व आशंका
12 मई की रात त्विषा शर्मा की मौत के बाद पुलिस अधिकारियों, न्यायिक सेवा के अधिकारियों, अधिवक्ताओं व करीबियों से कई बार गिरिबाला सिंह ने बात की, लेकिन तुरंत सूचना नहीं दी। गिरिबाला सिंह ने अपने घर का जो सीसीटीवी फुटेज पुलिस को सौंपा, उससे छेड़छाड़ की आशंका भी है। त्विषा के परिजनों ने आरोप भी लगाया है। शक इसलिए भी हो रहा है कि त्विषा की मौत समर्थ सिंह और गिरिबाला सिंह 12 मई की रात 10 बजे बता रही हैं, उनके घर के सीसीटीवी फुटेज में 11 मई को रात सवा आठ से साढ़े आठ बजे की घटना दिख रही है। इसके अलावा गिरिबाला सिंह ने 12 मई की दोपहर जिस ब्यूटी पॉर्लर पर त्विषा हेड मसाज कराने कई थी, वहां अपने परिचित भेजकर ब्यूटी पार्लर की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग अपने कब्जे में ले ली। उच्च न्यायालय ने भी माना कि दोनों आरोपी अधिवक्ता हैं। न्यायाधीश रहते गिरिबाला सिंह कई बार प्रशिक्षण प्राप्त कर चुकी हैं कि घटना के बाद किस तरह से अपराधी साक्ष्यों को मिटाते हैं, गायब करते हैं या उससे छेड़छाड़ करते हैं। इसलिए भी उनकी गिरफ्तारी की गई है।
पति समर्थ सिंह की अग्रिम जमानत याचिका खारिज
– फोटो : Amar Ujala
जांच को प्रभावित करने की आशंका
12 मई की रात दस बजे त्विशा शर्मा की मौत हुई, रात 12 बजे कटारा हिल्स पुलिस को त्विषा शर्मा की मौत की सूचना दी गई। यह सूचना भी तब दी गई, जब एम्स में डॉक्टरों ने चेक करने पर त्विषा की डेथ क्लियर करते हुए कहा कि आत्महत्या का मामला है, पहले पुलिस को सूचना दी जाए। तीन दिन तक अपने प्रभाव का उपयोग कर भोपाल पुलिस में मामला दर्ज नहीं करने दिया। त्विषा के परिजन दिल्ली से बड़े वकील बुलाकर लाए, उन्होंने पुलिस आयुक्त से बात की, कहा अगर केस दर्ज नहीं किया गया तो हम अंतिम संस्कार नहीं करेंगे, कोर्ट जाएंगे। इसके बाद केस दर्ज किया गया।
त्विषा शर्मा ने 12 मई को आत्महत्या कर ली थी।
– फोटो : अमर उजाला
मायके पक्ष को सुने बिना ही मिल गई अग्रिम जमानत
कटारा हिल्स थाने में दहेज हत्या का मामला दर्ज होते ही गिरिबाला सिंह ने भोपाल जिला अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका लगा दी। जिला अदालत ने भोपाल पुलिस से केस डायरी भी नहीं मांगी, मायके वालों का पक्ष सुने बिना ही इस आधार पर अग्रिम जमानत दे दी कि गिरिबाला सिंह वरिष्ठ न्यायिक सेवा की अधिकारी रही हैं, उनके बाहर रहने पर केस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। उच्च न्यायालय ने गिरिबाला सिंह की अक्रिम जमानत खारित करते हुए इस बात को माना कि भोपाल जिला अदालत को मायके वालों का पक्ष सुने बिना अग्रिम जमानत नहीं देना थी। यह प्रमुख कारण हैं, जिनके आधार पर गिरिबाला सिंह को सीबीआई ने गिरफ्तार किया है।