सुप्रीम कोर्ट से बुधवार को ई-कॉमर्स क्षेत्र की दिग्गज अमेरिकी कंपनी अमेजन को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसने फ्यूचर ग्रुप के साथ अमेजन के निवेश सौदे पर लगे एंटी-ट्रस्ट निलंबन के खिलाफ उसकी अपील खारिज कर दी थी। यह फैसला बुधवार को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने सुनाया।

सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के 17 दिसंबर 2021 के उस आदेश को भी पलट दिया है, जिसमें अमेजन पर 202 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था। इसके साथ ही सीसीआई के आदेश में फ्यूचर के साथ उसका सौदा निलंबित कर दिया गया था।
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सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया क्या फैसला?
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने फैसला सुनाते हुए कहा, “तमाम निष्कर्षों को देखते हुए अपील की अनुमति दी जाती है। एनसीएलएटी द्वारा 13 जून 2022 को पारित निर्णय और सीसीआई द्वारा 17 दिसंबर 2021 को पारित आदेश को रद्द किया जाता है।” न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने निर्देश दिया कि अमेजन से जमा कराई गई या वसूली गई कोई भी राशि आठ सप्ताह के भीतर वापस की जाए।
यह फैसला अमेजन के लिए एक महत्वपूर्ण जीत है, जो फ्यूचर ग्रुप के साथ अपने सौदे को लेकर लंबे समय से कानूनी लड़ाई लड़ रहा था। गौरतलब है कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग की ओर से अमेजन पर 202 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था। यह जुर्माना फ्यूचर कूपन्स प्राइवेट लिमिटेड (एफसीपीएल) में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने के दौरान अहम जानकारी छिपाने के आरोप में लगाया गया था।
अमेजन ने 2019 में दी थी जुर्माना लगाए जाने को चुनौती
अमेजन ने 2019 में फ्यूचर कूपन्स में निवेश के लिए मंजूरी लेते समय महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाने के आरोप में लगाए गए जुर्माने को चुनौती दी थी। मामला फ्यूचर कूपन्स प्राइवेट लिमिटेड में अमेजन के 2019 के निवेश से जुड़ा है, जो फ्यूचर रिटेल लिमिटेड (एफआरएल) से संबंधित इकाई थी।
अमेजन ने सीसीआई को बताया था कि वह एफसीपीएल में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीद रही है। इस सौदे में एफआरएल के 2.52 प्रतिशत शेयर एफसीपीएल को ट्रांसफर करने की व्यवस्था भी शामिल थी। अमेजन का कहना था कि यह निवेश एफसीपीएल के गिफ्ट कार्ड, लॉयल्टी कार्ड और पेमेंट कारोबार को मजबूत करने के लिए किया गया है।
सीसीआई ने पहले दी मंजूरी, फिर लगाया जुर्माना
सीसीआई ने 28 नवंबर 2019 को इस सौदे को मंजूरी दी थी। आयोग ने कहा था कि इस लेनदेन से भारत में प्रतिस्पर्धा पर प्रतिकूल असर पड़ने की संभावना नहीं है। हालांकि, आदेश में यह भी कहा गया था कि अगर दी गई जानकारी गलत पाई गई तो मंजूरी स्वतः निरस्त मानी जाएगी।
बाद में सीसीआई ने अमेजन के आंतरिक दस्तावेजों की जांच की। आयोग के अनुसार, इन दस्तावेजों से पता चला कि अमेजन की रुचि केवल एफसीपीएल के गिफ्ट कार्ड कारोबार तक सीमित नहीं थी, बल्कि उसका उद्देश्य फ्यूचर रिटेल और भारत के ऑफलाइन रिटेल सेक्टर में रणनीतिक पकड़ बनाना था।
सीसीआई ने माना अमेजन ने छिपाया वास्तविक उद्देश्य
दस्तावेजों में प्रोजेक्ट ताज, फ्यूचर रिटेल के स्टोर नेटवर्क, बड़े शहरों में तेज डिलीवरी, प्राइवेट लेबल ग्रोसरी और फैशन उत्पादों के साथ विदेशी निवेश नियमों में बदलाव होने पर हिस्सेदारी बढ़ाने की संभावना का जिक्र था। सीसीआई ने माना कि अमेजन ने सौदे के वास्तविक उद्देश्य और दायरे को छिपाया था।
17 दिसंबर 2021 को सीसीआई ने अमेजन-फ्यूचर सौदे को दी गई अपनी मंजूरी पर रोक लगा दी थी। इसी के साथ अमेजन को फॉर्म-II में नई सूचना दाखिल करने का निर्देश दिया था। साथ ही प्रतिस्पर्धा अधिनियम की धाराओं 43A, 44 और 45 के तहत 202 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था।
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अमेजन ने आदेश को दी एनसीएलएटी में चुनौती, लेकिन वहां भी खारिज हुई अपील
अमेजन ने इस आदेश को राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय अधिकरण में चुनौती दी थी। अधिकरण ने बड़े पैमाने पर सीसीआई के फैसले को बरकरार रखा और कहा कि अमेजन ने सौदे से जुड़ी जरूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई। अधिकरण ने धारा 43A के तहत लगाए गए जुर्माने में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए अमेजन को 45 दिनों के भीतर भुगतान करने का निर्देश दिया था।

