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Explained: दुनिया का सबसे बड़ा इबादत का सफर शुरू! 17 लाख हाजियों में कितने भारतीय, कैसे सऊदी अरब की GDP का 7% हिस्सा बना हज?

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हज 2026 शुरू हो चुका है. ये दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक और आर्थिक आयोजन है, जहां इबादत, इंतजाम और अर्थव्यवस्था तीनों एक साथ अपने चरम पर हैं. इस बार 15 लाख से ज्यादा विदेशी हाजी सऊदी अरब पहुंच चुके हैं और कुल तादाद 17 लाख पार करने का अनुमान है. इनमें भारत के 1.75 लाख हाजी शामिल हैं, जो अपने आप में एक इतिहास है. 26 मई को अराफात के मैदान पर जब 45 डिग्री की तपिश में करोड़ों हाथ दुआ के लिए उठेंगे, तो ये नजारा सिर्फ इबादत का नहीं, बल्कि एक ऐसे इंतजाम का भी होगा जिसकी मिसाल कहीं और नहीं मिलती. ये एक्सप्लेनर हज 2026 के हर उस पहलू का है, जो आपको हैरान कर देगा…

इस साल कितने लाख मुसलमान हज करेंगे?

पश्चिम एशिया में जारी तनाव और ईरान युद्ध के बावजूद, इस साल करीब 17 लाख हाजियों के हज में शामिल होने की उम्मीद है. ये वो आंकड़ा है जो पिछले साल के आंकड़ों को भी पीछे छोड़ता हुआ दिख रहा है. 2025 में कुल 16,73,230 लोगों ने हज किया था, जिनमें 15,06,576 विदेशी और 1,66,654 घरेलू (सऊदी नागरिक और प्रवासी) शामिल थे.

15 लाख से ज्यादा विदेशी हाजी और सऊदी अरब के लोकल आवेदनों की बाढ़

हज पासपोर्ट फोर्सेज के कमांडर सालेह अल-मुरब्बा ने 23 मई 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि 15,18,153 विदेशी हाजी अब तक सऊदी अरब पहुंच चुके हैं. ये आंकड़ा पिछले साल के विदेशी हाजियों की संख्या को पार कर चुका है और ये सिलसिला अभी जारी है.

वहीं, सऊदी अरब के अंदरूनी (Domestic) हाजियों के लिए इस साल जबरदस्त उत्साह देखने को मिला. 5,58,270 आवेदन दाखिल हुए, जिनमें से 59% पुरुषों और 41% महिलाओं के थे. इनमें से 3% आवेदक तो 20 साल से भी कम उम्र के नौजवान थे. यानी, हर उम्र का हर शख्स इस बुलावे पर लब्बैक कहने को तैयार है.

एक साथ हज का फरीजा अदा करने वाले देशों की लंबी फेहरिस्त

दुनिया के 180 से ज्यादा देशों के लोग इस साल हज कर रहे हैं. इसे आसान बनाने के लिए सऊदी अरब ने ‘मक्का रूट इनिशिएटिव’ नाम की एक खास पहल शुरू की है. इसके तहत 10 देशों के 17 हवाई अड्डों से अब तक   3,88,694 हाजियों को स्पेशल इमिग्रेशन और लॉजिस्टिक सुविधा दी गई है. इस पहल में इंडोनेशिया, मलेशिया, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मोरक्को, मालदीव, तुर्किये, कोटे डी आइवर, ट्यूनीशिया और अल्जीरिया जैसे देश शामिल हैं.

महिला और पुरुष की हिस्सेदारी: इबादत में बराबर की भागीदारी

2025 के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि हज करने वाले 16,73,230 लोगों में 8,77,841 पुरुष और 7,95,389 महिलाएं थीं. यानी कुल हाजियों में करीब 47% महिलाएं थीं. इस साल भी यही अनुपात रहने की उम्मीद है. भारत से इस बार 5,446 महिलाएं बिना मेहरम (बिना पुरुष अभिभावक) के हज करने जा रही हैं, जो नियमों में ढील के बाद अब तक की सबसे बड़ी संख्या है.

किन देशों से हाजियों की तादाद सबसे ज्यादा है?

2026 के हज कोटे के मुताबिक, दुनिया के जिन पांच देशों को सबसे ज्यादा कोटा मिला है, वो ये हैं:

रैंक देश हाजियों का कोटा (2026)
1 इंडोनेशिया 2,21,000
2 पाकिस्तान 1,80,000
3 भारत 1,75,025
4 बांग्लादेश 1,27,198
5 ईरान 87,000

हज का अहम रुक्न (स्तंभ) कहां अदा किया जाता है?

हज के चार अरकान (स्तंभ) हैं- इहराम, अराफात में ठहरना (वकूफ-ए-अराफा), तवाफ-ए-इफादा, और सई. इनमें सबसे अहम है अराफात का वकूफ (ठहरना). सुनन अबू दाऊद, हदीस नं. 1949 में लिखा है कि ‘अल-हज्जु अराफा’ यानी हज अराफात ही है.

अराफात का मैदान, जिसे ‘जबल-अल-रहमा’ (रहमत का पहाड़) भी कहा जाता है, मक्का से करीब 20 किलोमीटर दूर दक्षिण-पूर्व में स्थित है. 2026 में हज 25 मई को शुरू हो चुका है और अराफात का दिन (9 जिलहज्ज) 26 मई 2026 को होगा. इसी दिन सभी हाजी जुहर से मगरिब तक यहां ठहरते हैं, यही हज की रूह माना जाता है. अराफात के सबसे अहम रुक्न होने की 4 बड़ी वजहें हैं:

  1. यही हज का मकसद: हज का मतलब ही ‘इरादा करना’ या ‘तरफ बढ़ना’ है. अराफात का मैदान वो मुकाम है जहां अल्लाह और बंदे के बीच सीधा राब्ता कायम होता है. बाकी तीनों अरकान भी अहम हैं, लेकिन अराफात हज का क्लाइमेक्स है.
  2. इसके बिना हज नहीं: अन्य अरकान में से किसी एक के छूटने पर कफ्फारा (जुर्माना) देकर हज पूरा हो सकता है, लेकिन अराफात में ठहरे बिना हज मान्य ही नहीं होता. अगर कोई हाजी सूर्यास्त से पहले अराफात में हाजिर न हो, तो उसका पूरा हज बेकार माना जाता है.
  3. अल्लाह की रहमत का सबसे बड़ा नुजूल: अराफा के दिन अल्लाह अपनी सबसे बड़ी रहमत नाजिल करता है. हदीस में आता है कि इस दिन अल्लाह हाजियों के बारे में फरिश्तों के सामने कहता है, ‘देखो, ये मेरे बंदे हैं. मैंने इन्हें माफ कर दिया.’
  4. यह खुद को सौंपने और बराबरी का दिन: करोड़पति से लेकर फकीर, बादशाह से लेकर आम आदमी, सब बिना सिले दो सफेद कपड़ों में एक ही मैदान में खड़े होकर अपने रब से गिड़गिड़ाते हैं. दुनिया के किसी भी कोने में एकता और समर्पण की इससे बड़ी मिसाल नहीं मिलती.

इसीलिए कहा जाता है कि जो अराफात को समझ गया, वो हज को समझ गया.

एक भारतीय हाजी पर कितना खर्च आता है?

2026 में हज कमेटी ऑफ इंडिया (HCoI) का सरकारी पैकेज 3.36 लाख रुपए से 4.19 लाख रुपए के बीच है, जो अलग-अलग शहरों पर निर्भर करता है. हालांकि, पश्चिम एशिया के तनाव के चलते हवाई किराए में प्रति व्यक्ति 10,000 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते कई हाजियों को आखिरी वक्त में और पैसे जमा करने पड़े.

वहीं, प्राइवेट पैकेज की बात करें तो ये कहीं ज्यादा महंगे हैं. दिल्ली के एक प्राइवेट ऑपरेटर के मुताबिक, प्राइवेट हज पैकेज 10 लाख रुपये तक जा सकते हैं. आमतौर पर, इकॉनमी प्राइवेट पैकेज 4.85 लाख रुपए से शुरू होकर 6.5 लाख रुपए तक जाते हैं, जबकि VIP पैकेज इससे भी ऊपर होते हैं. विदेशों से (अमेरिका या ब्रिटेन जैसे) प्रीमियम पैकेज तो 15,000 डॉलर (करीब 12.5 लाख रुपये) से भी ऊपर चले जाते हैं.

हज पर कितना खर्च होता है और सऊदी अरब को कितनी आमदनी होती है?

हज और उमराह, दोनों मिलकर सऊदी अरब की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं. ये दोनों धार्मिक यात्राएं मिलकर हर साल करीब 12 अरब डॉलर (करीब 1 लाख करोड़ रुपये) की आमदनी कराती हैं. ये सऊदी अरब की नॉन-ऑयल GDP का 20% और कुल GDP का 7% है.

सिर्फ इस साल के हज की बात करें, तो मक्का चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रमुख माहेर जमाल के मुताबिक, हाजियों के कुल खर्च 20 से 25 अरब सऊदी रियाल (5.3 से 6.7 अरब डॉलर) रहने का अनुमान है, जो पिछले साल से 70% ज्यादा है.

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