देशभर में महंगाई के मोर्चे पर आम आदमी को एक और बड़ा झटका लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल, डीजल और सीएनजी की कीमतों में एक बार फिर इजाफा कर दिया है। पिछले 10 दिनों के भीतर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में करीब पांच रुपये प्रति लीटर तक की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। चुनाव के बाद कीमतों में लगी रोक हटने से परिवहन लागत बढ़ने और अर्थव्यवस्था पर महंगाई का दबाव बढ़ने की चिंताएं गहरा गई हैं। आइए, आसान सवालों के जरिए समझते हैं कि ईंधन के दाम क्यों बढ़ रहे हैं और इसके क्या आर्थिक मायने हैं।
सवाल: पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी कितनी है?
जवाब: नवीनतम संशोधन के तहत देश भर में पेट्रोल की कीमतों में 87 पैसे और डीजल में 91 पैसे प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई है। 15 मई से अब तक 10 दिनों से भी कम समय में यह कुल इजाफा लगभग 5 रुपये प्रति लीटर हो गया है। इस बढ़ोतरी के बाद राजधानी दिल्ली में पेट्रोल 99.51 रुपये और डीजल 92.49 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गया है। वहीं, सीएनजी के दाम भी 1 रुपये बढ़कर दिल्ली में 81.09 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए हैं, जिससे सीएनजी में हालिया कुल बढ़ोतरी 4 रुपये प्रति किलो हो गई है। महानगरों की बात करें तो मुंबई में पेट्रोल 108.49 रुपये और डीजल 95.02 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है।
सवाल: अचानक ईंधन के दाम क्यों बढ़ाए जा रहे हैं?
जवाब: ईंधन की कीमतों में इस भारी बढ़ोतरी का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का अस्थिर होना है। फरवरी के अंत से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है। इसके पीछे अमेरिका-इस्राइल की ओर से ईरान पर किए गए हमले और वैश्विक तेल पारगमन के प्रमुख मार्ग ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ में शिपमेंट में आई बाधाएं मुख्य वजह हैं। इसके अलावा, कमजोर रुपया और रिफाइनिंग मार्जिन का कड़ा होना भी आयात लागत को तेजी से बढ़ा रहा है।