बुंदेलखंड का बांदा इन दिनों भीषण तपिश से भट्ठी में तब्दील होता जा रहा है। पिछले चार दिनों से बांदा देश के सबसे गर्म शहर के तौर पर चर्चा में है। मंगलवार को यहां तापमान 48 डिग्री सेल्सियस के पार चला गया और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। दोपहर के समय सड़कें सूनी हो जाती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ मौसम का असर नहीं, बल्कि वर्षों से बिगड़ते पर्यावरणीय संतुलन, घटती हरियाली और अनियंत्रित खनन का नतीजा है।
खनन माफिया की लगी नजर
बुंदेलखंड के पर्यावरण एक्टिविस्ट पद्मश्री उमाशंकर पांडेय ने बताया कि बांदा पर खनन माफिया की नजर लगी है।
ये भी पढ़ें – झुलसाएगी गर्मी: यूपी के कई जिलों के लिए प्रचंड गर्मी व लू का रेड अलर्ट जारी, जरूरी हो तभी घर से निकलें
ये भी पढ़ें – अघोषित बिजली कटौती से हाहाकार: गांवों को सिर्फ 8 घंटे ही मिल रही बिजली, ऊर्जा मंत्री बोले- रिकॉर्ड आपूर्ति हो रही
– यहां से रोज दस हजार ट्रक बालू और इतनी ही गिट्टी का अंधाधुंध खनन हो रहा है। बंबेश्वर पहाड़ पर बसा बांदा शापित हो गया है। अब बांदा तो बचा, लेकिन बंबेश्वर पहाड़ गायब हो गया।
– उन्होंने बताया कि पिछले 50 वर्षों में ऐसी भीषण गर्मी नहीं देखी गई। कभी बेहतर जलस्तर और कुओं के लिए पहचाने जाने वाले बांदा में तालाबों और कुओं के नाम पर मोहल्ले बसे थे।
– शुक्ला कुआं और गोरहा कुआं मोहल्ले और प्रागी तालाब, नवाब साहब तालाब मोहल्ला इसकी बानगी हैं। अब पानी और हरियाली दोनों तेजी से गायब हो रहे हैं।