पश्चिम बंगाल सरकार ने अपने सभी स्तरों के कर्मचारियों के लिए कई प्रतिबंध जारी किए हैं। इसमें मीडिया में बयान देना, मीडिया बहसों में भाग लेना, सरकारी दस्तावेजों को सार्वजनिक करना और यहां तक कि राज्य सरकार की महत्वपूर्ण जानकारी लीक करना भी शामिल है।


किन प्रावधानों के तहत लगाया गए प्रतिबंध?
राज्य कार्मिक प्रशासनिक सुधार विभाग की ओर से यह आदेश बुधवार रात को जारी की गई। इसमें स्पष्ट किया गया है कि इस प्रकार के प्रतिबंध अखिल भारतीय सेवा (एआईएस) आचरण नियम, 1968, पश्चिम बंगाल सेवा (सरकारी कर्मचारियों के कर्तव्य, अधिकार और दायित्व) नियम 1980 और पश्चिम बंगाल सरकारी सेवक आचरण नियम, 1959 के पहले से मौजूद प्रावधानों के तहत लगाए गए हैं।
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किन पर होगा लागू?
यह प्रतिबंध राज्य सरकार से संबद्ध सभी भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस), पश्चिम बंगाल सिविल सेवा (डब्ल्यूबीसीएस), पश्चिम बंगाल पुलिस सेवा (डब्ल्यूबीपीएस) के अधिकारियों के साथ-साथ अन्य राज्य सरकारी कर्मचारियों, सुधार सेवा कर्मचारियों, राज्य सहायता प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों, राज्य संचालित बोर्डों, नगर पालिकाओं और नगर निगमों और राज्य सरकार के अधीन स्वायत्त निकायों पर लागू होंगे।
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क्या है प्रतिबंध?
इस अधिसूचना में पूर्व स्वीकृति के बिना, कोई भी कर्मचारी निजी तौर पर निर्मित किसी भी मीडिया कार्यक्रम या भारत सरकार द्वारा प्रायोजित या किसी बाहरी एजेंसी की ओर से निर्मित किसी भी मीडिया कार्यक्रम में भागीदारी या संबद्धता पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया गया है। इसके अलावा, बिना किसी सरकारी आदेश के, सेवाओं के सदस्यों द्वारा मीडिया के साथ किसी भी दस्तावेज या जानकारी के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संचार पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था।
यह सेवाओं के सदस्यों को किसी भी प्रकाशन, संवाद, कथन, प्रसारण या किसी भी मीडिया में योगदान के माध्यम से केंद्र या राज्य सरकार की किसी भी नीति या निर्णय की किसी भी प्रकार की आलोचना में शामिल होने से भी प्रतिबंधित करता है। अंतिम प्रतिबंध है कि किसी भी प्रकाशन, बातचीत, कथन, प्रसारण, या किसी भी मीडिया में योगदान पर प्रतिबंध है, जिससे राज्य सरकार और केंद्र सरकार या किसी अन्य राज्य सरकार के बीच, या केंद्र सरकार और किसी विदेशी राज्य की सरकार के बीच संबंधों में तनाव पैदा हो सकता है।
