भारत सरकार ने देश को नशीले पदार्थों से मुक्त बनाने के लिए 2047 तक का लक्ष्य रखा है। इस चुनौती से निपटने की दिशा में लगातार काम किया जा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण संबोधन में इस लक्ष्य को दोहराया। उन्होंने नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर दिया। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय और घरेलू ड्रग कार्टेल भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी के लिए नई रणनीतियां अपना रहे हैं। जम्मू-कश्मीर, पंजाब और महाराष्ट्र जैसे पारंपरिक हॉटस्पॉट के अलावा, अब केरल चिंता का नया केंद्र बनकर उभरा है।
पहले जहां ड्रग्स मुख्य रूप से अफगानिस्तान और पाकिस्तान से भारत में प्रवेश करते थे और फिर सड़क मार्ग से केरल पहुंचते थे। वहीं, अब तस्करी के तरीकों में बड़ा बदलाव आया है। सीमा सुरक्षा में सख्ती के कारण कार्टेलों ने अपने रास्ते बदल लिए हैं। अब म्यांमार से बड़ी मात्रा में ड्रग्स, विशेषकर हेरोइन, भारत में लाई जा रही है। ये ड्रग्स बांग्लादेश सीमा के रास्ते भारत में प्रवेश कर रही हैं और फिर केरल तक पहुंचाई जा रही हैं।
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हेरोइन और एमडीएमए जैसे नशीले पदार्थों की बढ़ी तस्करी
अधिकारियों के अनुसार, केरल में हेरोइन की तस्करी में भारी वृद्धि देखी जा रही है। इसकी वजह न केवल मांग है, बल्कि इससे जुड़े भारी मुनाफे भी हैं। हेरोइन की एक किलोग्राम की कीमत 25 से 30 लाख रुपये तक हो सकती है, जबकि डीलर इसे काफी कम कीमत पर खरीदकर बाजार में दोगुने से भी अधिक दाम पर बेचते हैं। हेरोइन के अलावा, एमडीएमए जैसे सिंथेटिक ड्रग्स की मांग भी बढ़ी है, जिसने गांजे की मांग को पीछे छोड़ दिया है।
तस्कर अपना रहे नई तरकीबें
तस्कर अब ड्रग्स को छिपाने के लिए नई और चालाक तरकीबें अपना रहे हैं। हेरोइन को साबुन के डिब्बों या छोटी बोतलों में छिपाकर तस्करी की जा रही है। इस तरह हर बार कम मात्रा में ड्रग्स लाई जाती है, जिससे एजेंसियों के लिए इसे पकड़ना मुश्किल हो जाता है। इसके अलावा तस्करी के लिए प्रभावशाली और हाई-प्रोफाइल व्यक्तियों का इस्तेमाल भी बढ़ गया है। तस्करों का मानना है कि ऐसे लोग जांच एजेंसियों की नजरों में कम आते हैं। महिलाओं को वाहक के तौर पर इस्तेमाल करने का चलन भी बढ़ा है।
केरल में मालाबार कॉरिडोर पर खास नजर
खुफिया एजेंसियों के अनुसार, केरल का मालाबार कॉरिडोर ड्रग्स से जुड़ी गतिविधियों में तेज वृद्धि के कारण विशेष निगरानी में है। कोझिकोड जैसे शहर इस क्षेत्र में तस्करी के संचालन के लिए एक प्रमुख केंद्र बन गए हैं। एक प्रमुख ट्रांजिट हब के रूप में इस क्षेत्र की बंगलूरू-मैसूरु कॉरिडोर से निकटता इसे तस्करों के लिए एक पसंदीदा ठिकाना बनाती है। कोझिकोड अंतरराज्यीय सड़क नेटवर्क से भी अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, जिससे मादक पदार्थों की आवाजाही आसान हो जाती है।
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करोड़ों के मादक पदार्थ हुए जब्त
हाल के दिनों में केरल में ड्रग्स की बरामदगी के कई मामले सामने आए हैं। कोच्चि के पास अंगमाली से तीन लोगों की गिरफ्तारी हुई, जिनके पास से 600 ग्राम हेरोइन बरामद हुई थी, जिसे साबुन के डिब्बों में छिपाया गया था। इसी तरह, कोझिकोड में एक अपार्टमेंट से 11.83 किलोग्राम एमडीएमए और 5.44 ग्राम गांजा बरामद किया गया। एक अन्य मामले में, एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर और एक अन्य व्यक्ति को 3.5 किलोग्राम एमडीएमए के साथ गिरफ्तार किया गया, जिसकी कीमत 3 करोड़ रुपये बताई गई।

