इसके बाद से विजय मिश्रा और उसके कुनबे की मुश्किलें लगातार बढ़ती चली गईं। उसे मध्य प्रदेश के मालवा जिले के आगर से गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल वह आगरा जेल में बंद है। विजय मिश्रा वर्ष 1980 के आसपास भदोही आया और कारोबार शुरू किया। इसके बाद उसने पेट्रोल पंप खोला और ट्रकों का संचालन शुरू किया। वर्ष 1990 में वह ब्लॉक प्रमुख बना। कांग्रेस के दिग्गज नेता कमलापति त्रिपाठी उसको राजनीति में लेकर आए थे। इसके बाद उसने पहला चुनाव ब्लॉक प्रमुख का लड़ा और जीत हासिल की।
कई ब्राह्मण नेताओं की हत्या का आरोप लगा
विजय मिश्रा ने खुद को ब्राह्मणों के मसीहा के रूप में स्थापित करने की कोशिश की लेकिन पूर्व सांसद गोरखनाथ पांडेय के छोटे भाई रामेश्वर नाथ पांडेय और पूर्व मंत्री राकेशधर त्रिपाठी के भाई धरनीधर त्रिपाठी समेत कई ब्राह्मण नेताओं की हत्या का आरोप भी उस पर लगे। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, वर्ष 2001 में समाजवादी पार्टी ने उसे इस शर्त पर ज्ञानपुर सीट से टिकट दिया था कि वह हंडिया, भदोही और मिर्जापुर में सपा प्रत्याशियों को जीत दिलाएगा। भदोही लोकसभा सीट भी पार्टी की झोली में डलवाएगा।
2007 में सपा के टिकट पर विधायक चुना गया विजय
सभी सीटों पर सपा की जीत हुई और इसके बाद विजय मिश्रा का राजनीतिक प्रभाव तेजी से बढ़ता गया। वह 2007 में सपा के टिकट पर विधायक चुना गया। वर्ष 2012 में जेल में रहने के बावजूद सपा के टिकट पर चुनाव में जीत दर्ज की। वर्ष 2017 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की नाराजगी के कारण उसका टिकट कट गया था लेकिन उसने निषाद पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़कर जीत दर्ज की। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में जेल में रहने के बावजूद विजय मिश्रा मैदान में उतरा। जिला पंचायत अध्यक्ष पत्नी रामलली मिश्रा और बेटी ने गांव-गांव जाकर वोट मांगे। किसी बड़े दल से टिकट नहीं मिलने पर उसने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) से चुनाव लड़ा, लेकिन तीसरे स्थान पर रहा। पूर्व विधायक के साथ उसका बेटा और भतीजा पहले से जेल में बंद हैं।






