अन्नाद्रमुक (एआईएडीएमके) में अंदरूनी कलह अब दोफाड़ होने की स्थिति में खुलकर सामने आ गई है। एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने बुधवार को पार्टी के बागी नेताओं एसपी वेलुमणि, सीवे षणमुगम और सी विजयभास्कर को उनके पदों से हटा दिया। पलानीस्वामी की इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए सीवे षणमुगम ने इसे अवैध बताया है।
पलानीस्वामी ने बागी विधायकों पर कार्रवाई की है, जिनमें वरिष्ठ नेता नथम आर विश्वनाथन भी शामिल हैं। इन विधायकों ने तमिलनाडु विधानसभा में विश्वास मत के दौरान टीवीके सरकार के पक्ष में मतदान करके पार्टी के निर्देश का उल्लंघन किया था। इसके बाद पलानीस्वामी ने 12 बागी विधायकों और उनके समर्थकों को पार्टी के विभिन्न पदों से हटाकर नए जिला सचिवों की नियुक्ति की है।
ये भी पढ़ें: BRICS Foreign Ministers Meets: बैठक में दिखी भारत-रूस की दोस्ती, जयशंकर-लावरोव वार्ता से दुनिया को बड़ा संदेश
पलानीस्वामी पर लगाए गंभीर आरोप
एआईएडीएमके नेता ने पलानीस्वामी पर आरोप लगाते हुए कहा, “अगर हमने कुछ गलत किया होता, तो पार्टी के महासचिव के तौर पर उन्हें (पलानीस्वामी) हमसे बात करनी चाहिए थी और पार्टी को आगे बढ़ाना चाहिए था। लेकिन पलानीस्वामी ने महासचिव के रूप में अपने चार साल के कार्यकाल में सिर्फ पार्टी और पार्टी पदों से बर्खास्तगी का काम किया है।”
जो सवाल उठाता है, पार्टी से बर्खास्त हो जाता है :षणमुगम
उन्होंने कहा, “जो भी उन पर सवाल उठाता है, उसे पद से और यहां तक कि पार्टी से भी बर्खास्त कर दिया जाता है। आज हमारे 26 पार्टी पदाधिकारियों को उनके पदों से बर्खास्त किया है। उन्हें इतनी शक्ति किसने दी? उनके पास कोई शक्ति नहीं है और उनके द्वारा जारी किया गया बयान स्वीकार नहीं किया जाएगा। पलानीस्वामी ने एआईएडीएमके की मूल नीति को कमजोर कर दिया है।”
डीएमडीके से खटास की वजह भी पलानीस्वामी
सीवे षणमुगम ने कहा, “पलानीस्वामी ने डीएमडीके को राज्यसभा सीट देने का वादा किया था, लेकिन चुनाव के बाद उन्होंने इनकार कर दिया। हमने उसी समय उनके इस रुख का विरोध किया था। इसीलिए वे हमारे गठबंधन से अलग हो गए। फिर भी उनकी पहली पसंद एआईएडीएमके ही थी, लेकिन पलानीस्वामी ने मना कर दिया। वे अपनी बात पर अड़े रहे। अब एआईएडीएमके को लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है। आज हम तीसरे स्थान पर आ गए हैं।”
हार की जिम्मेदारी लेने से बच रहे ईपीएस
एआईएडीएमके नेता ने कहा, “आज जब ईपीएस से पूछा जाता है कि हम क्यों हारे, तो वे पूछते हैं, ‘क्या पार्टी 1996 में नहीं हारी थी? क्या हम 2006 में भी नहीं हारे थे?’ जी हां, हम हारे थे। लेकिन पुरची थलाइवी अम्मा में पार्टी को फिर से सत्ता में लाने की क्षमता थी। हर हार के बाद, अम्मा घोषणा करती थीं कि वे एमजीआर के शासन को फिर से स्थापित करेंगी और वे पार्टी को दूसरी बार सत्ता में लाने में सफल रहीं।”
ये भी पढ़ें: केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: सीबीआई निदेशक प्रवीण सूद को फिर मिला सेवा विस्तार, लगातार दूसरी बार बढ़ा कार्यकाल
षणमुगम बोले- अवैध है कार्रवाई
पार्टी की ओर से जारी एक बयान में पलानीस्वामी ने तत्काल प्रभाव से 26 विधायकों को सभी पार्टी पदों से बर्खास्त करने की घोषणा की। पार्टी की अनुशासनात्मक कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए षणमुगम ने कहा कि उन्हें हटाना अवैध है। उन्होंने कहा कि पार्टी महासचिव ने कार्रवाई शुरू करने से पहले उनसे कोई स्पष्टीकरण नहीं मांगा था।
एआईएडीएमके नेता ने कहा, “उन्हें (ईपीएस को) हमें पार्टी पदों से बर्खास्त करने का कोई अधिकार नहीं है। यह बर्खास्तगी वैध नहीं है। उनके पास कोई अधिकार नहीं है। एआईएडीएमके की आम सभा में भाग लेने से हमें कोई नहीं रोक सकता।”
अन्य वीडियो


