कर्नाटक के तुमकुरु जिले से मानवता को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। यहां के अमलापुरा गांव में स्थित एक मदरसे में बिहार के 24 बच्चों को बंधक बनाकर उनसे मजदूरी कराई जा रही थी। शारीरिक प्रताड़ना और शोषण से तंग आकर ये बच्चे किसी तरह वहां से भाग निकले। पुलिस ने आरोपी उपदेशक मौलाली के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है।
आरपीएफ की मुस्तैदी से खुला राज
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब बंगलूरू के क्रांतिवीरा संगोल्ली रायन्ना रेलवे स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के जवानों ने बच्चों के एक बड़े समूह को लावारिस हालत में देखा। पूछताछ के दौरान बच्चे बुरी तरह डरे हुए थे। उन्होंने अधिकारियों को बताया कि वे तुमकुरु के मदरसे से भागकर आए हैं। वे किसी भी तरह अपने घर बिहार वापस जाना चाहते थे। स्टेशन की भीड़ और बड़े प्लेटफार्म को देखकर वे वहां रुक गए और बिहार जाने वाली ट्रेन तलाशने लगे।
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मजदूरी और मारपीट का आरोप
काउंसलिंग के दौरान बच्चों ने अपनी आपबीती सुनाई। आठ से 17 साल की उम्र के इन बच्चों ने बताया कि मदरसे में उनके साथ मारपीट की जाती थी। उनसे पढ़ाई के बजाय परिसर के भीतर निर्माण कार्य कराया जा रहा था। बच्चों ने आरोप लगाया कि उन्हें जबरन दीवार बनाने के काम में लगाया गया था। इतना ही नहीं, उन्हें उनके माता-पिता से बात करने की भी अनुमति नहीं दी जाती थी।
कड़ी धाराओं में केस दर्ज
बच्चों को फिलहाल बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) की देखरेख में रखा गया है। पुलिस ने आरोपी मौलाली के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), किशोर न्याय (जेजे) अधिनियम और बाल श्रम निषेध अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। पहले यह मामला रेलवे पुलिस ने दर्ज किया था, जिसे अब तुमकुरु ग्रामीण पुलिस को सौंप दिया गया है। पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है।
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