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अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति:सफल छात्रों से बोले राज्यसभा के उपसभापति- जो बदलाव के लिए तैयार नहीं वे अनपढ़! – Atul Maheshwari Scholarship: Rajya Sabha Deputy Chairman Harivansh Narayan Singh Meets Successful Students

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अनपढ़ वे नहीं होंगे जिन्हें पढ़ना-लिखना नहीं आता, बल्कि वे होंगे जो बदलते समय में नई चीजों को नहीं सीखेंगे। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने यह बात अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति-25 के सफल विद्यार्थियों से कहीं। उन्होंने यह कहा कि जीवन में कोई शॉर्टकट नहीं होता है। इसलिए सफलता पाने के लिए मेहनत पर ही ध्यान दें। 

अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से आयोजित अतुल माहेश्वरी छात्रवृत्ति 2025 कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में हरिवंश ने अपने सरकारी आवास पर 41 मेधावी छात्रों को सम्मानित किया। इस दौरान उन्होंने बच्चों की हर जिज्ञासा को शांत किया। 

उपसभापति ने संबोधन की शुरुआत में बच्चों को सहज करते हुए कहा कि यह आवास मेरा नहीं सरकार का आवास है जिसका एक हिस्सा देश का नागरिक होते हुए आपका भी है। उन्होंने अमर उजाला के संस्थापक अतुल माहेश्वरी की दूरदर्शिता की सराहना करते हुए कहा कि अखबार के व्यवसाय में बहुत कम लोग दूरदर्शी होते हैं और उन चुनिंदा लोगों में अतुल माहेश्वरी शामिल थे।

अमर उजाला अखबार सिर्फ खबरें ही नहीं देता, बल्कि समाज के लिए कई महत्वपूर्ण सामाजिक कार्य भी करता है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि 2047 तक विकसित भारत बनाने का संकल्प उनकी पीढ़ी को लेना होगा। बदलते समय के साथ खुद को भी बदलना जरूरी है, तभी नई दुनिया को समझा और देखा जा सकता है। इससे पहले छात्र-छात्राओं ने दिल्ली के प्रसिद्ध स्थलों का भ्रमण भी किया, जिसमें इंडिया गेट और प्रधानमंत्री संग्रहालय शामिल रहे।

बचपन किया याद 

हरिवंश ने अपने गांव की कहानी साझा की, मैं एक ऐसे गांव से निकला जो गंगा और घाघरा के बीच बसा था, जहां रास्ते नहीं थे। उन्होंने महिलाओं की प्रगति की सराहना करते हुए कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में आगे हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक यादें साझा करते हुए बताया, पहली बार दिल्ली आया तो मेरी जेब से 50 पैसे गिर गए जो आज भी मुझे याद है। उन्होंने कहा कि जो छात्र पहली बार किसी नए शहर में आकर कुछ करने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें संघर्ष से घबराना नहीं चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि गांव से आने वाले छात्रों को डरने की जरूरत नहीं है, क्योंकि गांव ही उन्हें संघर्ष की असली ताकत देता है। गांव से मिली सीख और मजबूती ही आगे बढ़ने की प्रेरणा बनती है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए हौसला बनाए रखना जरूरी है। 

एक लाख बच्चों की भागीदारी, प्रक्रिया की निष्पक्षता का प्रमाण

कार्यक्रम में छात्रवृत्ति योजना की सफलता और शिक्षा के महत्व पर हरिवंश ने विस्तृत चर्चा की और नवोन्मेषक अतुल माहेश्वरी के नाम पर बच्चों के लिए शुरू की गई छात्रवृत्ति योजना को उल्लेखनीय बताया। उन्होंने कहा कि अब तक कुल 364 विद्यार्थियों को स्कॉलरशिप दी जा चुकी है। इस बार उत्तर प्रदेश, चंडीगढ़ और उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश समेत देश के अन्य राज्यों के बच्चों को शामिल किया गया है। इस बार 1 लाख से अधिक बच्चों ने आवेदन किया था। उन्होंने कहा कि एक लाख बच्चों के इस परीक्षा में शामिल होना इस प्रक्रिया के निष्पक्ष होने का द्योतक है। 

बच्चों के सवालों का हरिवंश ने दिया जवाब 


भारत में लोगों को लगता है कि राष्ट्रपति के पास प्रधानमंत्री से कम शक्तियां हैं, ऐसा क्यों है?

हमारा देश जब आजाद हुआ तो हमारे नेताओं ने शक्तियों को अलग-अलग बांटा—कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका। प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल की सलाह पर राष्ट्रपति काम करते हैं, जैसा संविधान में उल्लेखित है। हर पद संविधान द्वारा प्रदत्त शक्तियों के आधार पर चलता है।

पत्रकारिता का अनुभव राज्यसभा में आपकी किस प्रकार मदद करता है?

पत्रकार के तौर पर सभी विषयों में दिलचस्पी होती है जो पहले से कई मुद्दों पर जानकारी दे देती है। यह जानकारी वर्तमान में हमारी मदद कर रही है। सदन में कार्रवाई कैसे चलती है। सदन की क्या उपयोगिता है जैसे कई सवाल पत्रकारिता जीवन में ही पहली बार सामने आया था।

क्या राज्यसभा के गठन के उद्देश्यों का अनुपालन नहीं हो पा रहा है, क्योंकि चुने गए सदस्य मानकों के अनुकूल नहीं हैं?

ऐसा नहीं है। पहले भी उच्च सदन में विभिन्न क्षेत्रों से आने वाली प्रतिभाओं को मनोनीत करने की परंपरा रही है। वर्तमान में सुधा मूर्ति, इलियास राजा और अन्य विशेषज्ञ मनोनीत होकर राज्यसभा पहुंच रहे हैं। गांधीजी इस सदन के गठन के खिलाफ थे, लेकिन अन्य का विचार था कि देश की प्रतिभाओं को कानून निर्माण में शामिल करने के लिए ऐसा सदन आवश्यक है।

फ्री बीज कल्चर को स्किल डेवलपमेंट में लगाया जा सकता है? क्या इसे बंद नहीं किया जा सकता?

वर्ल्ड बैंक के अनुसार 27 करोड़ लोग गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करते हैं। उन्हें ऊपर लाना हर सरकार की जिम्मेदारी है। क्योंकि देश के हर नागरिक को आगे बढ़ाना जरूरी है। ऐसे में लोगों को खुद ही सुविधाओं को छोड़ने की पहल करनी चाहिए जब उन्हें इसकी जरूरत न रहे।

नई शिक्षा नीति डिग्री पर फोकस करती है लेकिन वर्तमान समय में स्किल पर ज्यादा फोकस होना चाहिए?

नई शिक्षा नीति में स्कूली स्तर पर कौशल विकास पर अधिक ध्यान दिया गया है। गांधी जी ने आजादी के आंदोलन के दौरान ही स्वरोजगार पर स्पष्ट विचार रखे थे। 1952 में अपनाई गई विदेशी शिक्षा नीति हमारे लिए अच्छे परिणाम नहीं लाई।

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