NDMA Mock Drill 2nd May: आज यानी 2 मई को दोपहर 12 बजे से लेकर शाम 6 बजे के बीच अगर आपके फोन पर अचानक तेज बीप की आवाज के साथ कोई इमरजेंसी मैसेज आए, तो घबराएं नहीं। भारत सरकार का दूरसंचार विभाग (DoT) राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के साथ मिलकर ‘सेल ब्रॉडकास्ट अलर्ट सिस्टम’ का मॉक ड्रिल कर रहा है।
आज पहला अलर्ट भेजा जा चुका है, जिससे बहुत से लोग भ्रमित हो गए कि उन्हें क्या करना चाहिए। यह सिर्फ एक परीक्षण है ताकि भविष्य में किसी भी आपदा या आपात स्थिति के दौरान लोगों को समय रहते सूचित किया जा सके। आइए इसी के बारे में कुछ जरूरी बातें समझते हैं।

2 of 5
मोबाइल पर अलर्ट आने वाला मॉक ड्रिल
– फोटो : AI
अलर्ट आने पर क्या करें?
- पैनिक न हों- यह केवल एक टेस्टिंग मैसेज है, इसलिए घबराने या डरने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।
- मैसेज पढ़ें – स्क्रीन पर आने वाले पॉप-अप मैसेज को ध्यान से पढ़ें, उसमें स्पष्ट लिखा होगा कि यह एक ‘मॉक ड्रिल’ है।
- ओके (OK) पर क्लिक करें – मैसेज देखने के बाद आप स्क्रीन पर दिए गए ‘OK’ बटन पर क्लिक करके इसे हटा सकते हैं।

3 of 5
क्यों किया जा रहा है मोबाइल पर अलर्ट आने वाला मॉक ड्रिल?
– फोटो : Adobe Stock
क्यों किया जा रहा है यह मॉक ड्रिल?
- आपदा प्रबंधन- इसका मुख्य उद्देश्य बाढ़, भूकंप या सुनामी जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय लोगों की जान बचाना है।
- सिस्टम की जांच – सरकार यह सुनिश्चित करना चाहती है कि क्या यह तकनीक सभी मोबाइल नेटवर्क और फोन मॉडल्स पर सही से काम कर रही है।
- सटीकता का परीक्षण – अलग-अलग क्षेत्रों में एक साथ मैसेज भेजकर सिस्टम की क्षमता और गति को परखा जा रहा है।

4 of 5
क्यों किया जा रहा है मोबाइल पर अलर्ट आने वाला मॉक ड्रिल?
– फोटो : Adobe Stock
अलर्ट की मुख्य विशेषताएं
- तेज आवाज – यह मैसेज एक विशिष्ट ध्वनि और वाइब्रेशन के साथ आता है, जिसे साइलेंट मोड पर भी सुना जा सकता है।
- नेटवर्क आधारित – इसके लिए इंटरनेट की आवश्यकता नहीं होती, यह सीधे सेलुलर नेटवर्क के जरिए आपके फोन तक पहुंचता है।
- बहुभाषी – सरकार द्वारा यह अलर्ट हिंदी और अंग्रेजी के साथ-साथ क्षेत्रीय भाषाओं में भी भेजा जा सकता है।

5 of 5
क्यों किया जा रहा है मोबाइल पर अलर्ट आने वाला मॉक ड्रिल?
– फोटो : Adobe Stock
भ्रम दूर करने के लिए जरूरी बातें
- इस मैसेज के जवाब में आपको किसी को कॉल करने या कोई व्यक्तिगत जानकारी साझा करने की आवश्यकता नहीं है।
- यह ट्रायल रैंडम आधार पर अलग-अलग राज्यों और नेटवर्क पर किया जा रहा है, इसलिए कुछ लोगों को यह पहले मिल सकता है और कुछ को बाद में।
- सोशल मीडिया पर फैल रही किसी भी गलत जानकारी पर यकीन न करें, यह पूरी तरह सरकारी और सुरक्षित प्रक्रिया है।


