पश्चिम एशिया संघर्ष को खत्म करने की कोशिशें जारी हैं। इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हमेशा के लिए अमेरिका के साथ युद्ध खत्म करने को लेकर एक खाका पेश किया।
अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान ने पश्चिम एशिया में अमेरिका के साथ चल रहे संघर्ष को स्थायी रूप से समाप्त करने के उद्देश्य से एक खाका साझा किया है। उन्होंने इस्लामाबाद में पाकिस्तानी नेतृत्व के साथ हुई चर्चाओं के दौरान अपनी स्थिति स्पष्ट की।
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अमेरिका के साथ शांति वार्ता पर क्या बोले अराघची?
इस्लामाबाद से निकलने के बाद ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में अराघची ने कहा कि ईरान ने युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने के लिए एक व्यावहारिक खाके पर अपनी स्थिति साझा की है। उन्होंने आगे कहा कि यह देखना बाकी है कि क्या अमेरिका वास्तव में कूटनीति के प्रति गंभीर है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्लामाबाद जाने वाले प्रतिनिधिमंडल का दौरा रद्द कर दिया है। वहीं, नेतृत्व में ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तानी नेतृत्व के साथ उच्च-स्तरीय बैठकों के एक दिन बाद शनिवार शाम इस्लामाबाद से रवाना हुआ। इससे अमेरिका-ईरान शांति समझौते को मध्यस्थता करने के पाकिस्तान के महत्वाकांक्षी दावों को दूसरे दौर की बातचीत में झटका लगा।
पाकिस्तान को सौंपी आधिकारिक मांगों की सूची
अलजजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में संघर्ष का पूर्ण समाधान प्राप्त करने के लिए ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने पाकिस्तानी नेताओं को आधिकारिक मांगों की सूची सौंपी। अब पाकिस्तान की ओर से अमेरिका और इस्राइल को ये मांगें बताई जाएंगी। गौरतलब है कि अराघची अपनी तीन देशों की यात्रा के हिस्से के रूप में ओमान और रूस का भी दौरा करेंगे।
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इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने ईरान के नेतृत्व के भीतर भयानक आपसी कलह और भ्रम के कारण विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और वरिष्ठ सलाहकार जेरेड कुशनर की इस्लामाबाद की निर्धारित यात्रा रद्द कर दी है। उन्होंने आगे की बातचीत के लिए ईरान पर जिम्मेदारी डाल दी। ट्रंप ने कहा, “हमारे पास सारे पत्ते हैं, उनके पास कुछ नहीं। अगर वे बात करना चाहते हैं, तो उन्हें बस फोन करना होगा।”
कहां अटकी है बात?
सूत्रों के मुताबिक अमेरिका चाहता है कि दोनों पक्ष एक ही कमरे में बैठकर बात करें, जबकि ईरान इसके लिए तैयार नहीं है। उसकी मांग है कि बातचीत शुरू होने से पहले अमेरिका कम से कम तेल निर्यात पर लगी पाबंदियों में ढील दे। अमेरिका ईरान के यूरेनियम को देश से बाहर भेजने की भी मांग कर रहा है, जिस पर तेहरान सहमत नहीं है।
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