उत्तराखंड इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा के परिणामों में इस बार एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जिसने साबित कर दिया कि मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन से कोई भी सपना दूर नहीं होता। आवास विकास सरस्वती विद्या मंदिर के होनहार छात्र आर्यन ने 97.80 प्रतिशत अंक प्राप्त कर पूरे प्रदेश की मेरिट सूची में दूसरा स्थान हासिल किया है।
साधारण परिवार से आने वाले आर्यन की यह सफलता कई युवाओं के लिए मिसाल बन गई है। उनके पिता मनोज एक बाइक स्पेयर पार्ट की दुकान में काम करते हैं, जबकि माता विनीता ने हमेशा बेटे के सपनों को सहेजते हुए हर कदम पर उसका साथ दिया। छोटे भाई-बहनों के बीच जिम्मेदारियों के साथ पढ़ाई करना आसान नहीं था, लेकिन आर्यन ने कभी अपने लक्ष्य से नजर नहीं हटाई।
माता-पिता, शिक्षकों को दिया सफलता का श्रेय
अपनी इस उपलब्धि का श्रेय आर्यन अपने माता-पिता, शिक्षकों और अपनी लगातार मेहनत को देते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले दो वर्षों में शिक्षकों का मार्गदर्शन और नियमित अभ्यास उनकी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी रहा। आर्यन के शब्दों में, “यह सिर्फ मेरी नहीं, मेरे परिवार और शिक्षकों की भी जीत है।
आर्यन का सपना अब इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर एक सफल सॉफ्टवेयर इंजीनियर बनने का है। उनका मानना है कि शिक्षा ही वह माध्यम है, जो किसी भी व्यक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचा सकती है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य ने भी इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि आर्यन की सफलता पूरे विद्यालय के लिए प्रेरणा है और यह साबित करती है कि समर्पण और अनुशासन से हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। आर्यन की यह कहानी उन सभी छात्रों के लिए संदेश है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।


