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भीखमंगे पाकिस्तान के और खराब हुए हालात, रेलवे चलाने के भी नहीं पैसे, भगवान भरोसे पैसेंजर्स की सुरक्षा

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Pakistan Railways: पाकिस्तान की रेलवे व्यवस्था इस वक्त गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रही है, जहां बहुत कम संसाधनों के बावजूद यात्री और मालगाड़ी सेवाओं को किसी तरह से चलाया जा रहा है. यह परिस्थिति न सिर्फ सेवाओं पर असर डाल रही है, बल्कि यात्रियों और कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा कर रही है.

पाकिस्तानी अखबार डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, संसाधनों की कमी की वजह से मेनटेनेंस और ऑपरेशन्स में गंभीर समझौते किए जा रहे हैं. अधिकारियों का तो यहां तक कहना है कि फंड की कमी के कारण ट्रेन के इंजन, कोच, वैगन और रेलवे ट्रैक जैसे महत्वपूर्ण ढांचों को काफी ज्यादा नुकसान हो रहा है और इससे दुर्घटनाओं का खतरा भी काफी ज्यादा बढ़ गया है.

5 लाख PKR फंड के लिए भी लंबी प्रक्रिया पार करने की मजबूरी

कई आंतरिक बैठकों में पाकिस्तानी रेलवे के इस संकट की गंभीरता सामने आई है, जहां अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारियां ठीक से निभाने में असमर्थता जताई. लाहौर डिवीजन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि डिवीजन में करीब 50 प्रतिशत स्वीकृत पद खाली हैं.

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उन्होंने यह भी कहा कि PKR (पाकिस्तानी रुपये) 500,000 जैसे छोटे फाइलेंशियल प्रस्तावों को मंजूरी दिलाने में भी मुख्यालय के साथ लंबी नौकरशाही प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. इससे सही समय पर जरूरी कार्रवाई करना मुश्किल हो जाता है. इन चुनौतियों के बावजूद, रेलवे कर्मचारी भारी दबाव में काम कर रहे हैं ताकि सेवाओं को सामान्य तरीके से जारी रखा जा सके.

पाकिस्तानी रेलवे की कैसे हुई ये हालत?

दरअसल, पाकिस्तान की रेलवे व्यवस्था की यह मुश्किल लंबे वक्त से चली आ रही संरचनात्मक और वित्तीय कमजोरियों का नतीजा है, जो पिछले 6–7 सालों में और ज्यादा गंभीर हो गया है और साल 2026 में एक गंभीर स्तर तक पहुंच चुका है. यहां तक कि निवर्तमान मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) भी व्यवस्था का संचालन बनाए रखने और समय पर सैलेरी देने में संघर्ष करते रहे, जो इसकी संस्थागत परेशानी की गहराई को दिखाता है.

एक कोच के पुर्जे निकालकर दूसरे को कर रहे ठीक

डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, हालत इतनी ज्यादा खराब है कि कर्मचारियों को एक कोच के पुर्जे निकालकर दूसरे को ठीक करना पड़ा रहा है. पाकिस्तान रेलवे के सभी आठ डिवीजन- लाहौर, कराची, मुल्तान, सुक्कुर, क्वेटा, रावलपिंडी, पेशावर और वर्कशॉप डिवीजन, एक जैसे मुश्किलों का सामना कर रहे हैं. अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि मौजूदा हालात में परिचालन और रेवेन्य टार्गेट्स को हासिल करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है.

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