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बुरी खबर! अर्थव्यवस्था की रेस में पिछड़ा भारत, छठे नंबर पर पहुंचा, अब कौनसे 5 देश हैं आगे? जानिए

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Indian Economy: ईरान वॉर के बाद पैदा हुए वैश्विक संकट के बीच भारत के लिए बुरी खबर सामने आई है. इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) की ताज़ा ग्लोबल GDP डेटा की रिपोर्ट के मुताबिक भारत दुनिया की छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है. ठीक एक साल पहले भारत को कुछ समय के लिए चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बताया गया था.

आईएमएफ की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में भारत की GDP लगभग 2.25 ट्रिलियन डॉलर पर है. दूसरी तरफ भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले दबाव में है. डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ने रुपए को कमजोर किया है. इसका मतलब है कि अगर रुपया स्थिर रहता तो ग्लोबल मार्केट में भारत रैंकिंग और बेहतर हो सकती थी. कमजोर रुपया आयात को महंगा बना देता है, जिसका सीधा असर देश के व्यापार घाटे पर पड़ता है.

भारत से आगे कौनसे देश?

    1. अमेरिका
    2. चीन
    3. जापान
    4. जर्मनी
    5. यूनाइटेड किंगडम
    6. भारत

बुरी खबर! अर्थव्यवस्था की रेस में पिछड़ा भारत, छठे नंबर पर पहुंचा, अब कौनसे 5 देश हैं आगे? जानिए

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के सामने अब दोहरी चुनौती है. पहली अपनी विकास दर यानी जीडीपी ग्रोथ को 7-8% के स्तर पर बनाए रखना और दूसरी रुपए की अस्थिरता को नियंत्रित करना.

अर्थव्यवस्था पर एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स का क्या कहना है?

बता दें कि एसएंडपी ग्लोबल रेटिंग्स का मानना है कि ईरान युद्ध के बीच अगर चालू वित्त वर्ष में कच्चे तेल की औसत कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल रहती है तब भी भारतीय अर्थव्यवस्था के 6.3 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ऊर्जा की कीमतों के झटके से होने वाले राजकोषीय दबाव का भारत की संप्रभु साख रेटिंग पर असर पड़ने की आशंका नहीं है, क्योंकि भारत के पास लंबी अवधि में राजकोषीय सुदृढ़ीकरण की राजनीतिक प्रतिबद्धता है.

एसएंडपी के निदेशक यी फर्न फुआ ने कहा कि अगर कच्चे तेल की औसत कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल रहती है तो भारत 2026-27 में 7.1 प्रतिशत की दर से बढ़ेगा. उनका कहना है कि दुनिया की किसी भी प्रमुख अर्थव्यवस्था की तुलना में यह आंकड़ा अभी भी बहुत मजबूत है. वैकल्पिक परिदृश्य में भी कहें कि औसत कीमत 130 डॉलर प्रति बैरल रहती है तो भी हम 6.3 प्रतिशत की वृद्धि दर देख रहे हैं. ऐसे में भी भारत की वृद्धि दर प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे ज्यादा होगी.

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