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Tata Trusts विवाद में आया नया मोड, मेहली मिस्त्री ने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के सामने कर दी ये डिमांड

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Tata Group Row: टाटा ग्रुप की सबसे बड़ी हिस्सेदार और चैरिटी संस्था टाटा ट्रस्ट्स में विवाद गहराता जा रहा है. दरअसल, पूर्व ट्रस्टी मेहली मिस्त्री ने सर दोराबजी टाटा ट्रस्ट (SDTT) के प्रशासन में गंभीर गैर-कानूनी कामों का आरोप लगाया है और ट्रस्ट को चलाने के लिए एक प्रशासक की नियुक्ति की मांग की है.

उन्होंने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर के पास शिकायत दर्ज कराते हुए कहा है कि ट्रस्ट में सबकुछ पारदर्शी तरीके से नहीं चल रहा है. उनका आरोप है कि ट्रस्ट के वर्तमान वरिष्ठ सदस्य नियमों के खिलाफ जाकर काम कर रहे हैं. मिस्त्री ने ट्रस्टी बोर्ड की वैधता पर सवाल उठाया और तर्क दिया कि हाल के दिनों में की गई नियुक्तियां महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट एक्ट 1950 की धारा 30A का उल्लंघन करके की गई थीं. ट्रस्टी बोर्ड में अब नोएल टाटा (चेयरमैन), वेणु श्रीनिवासन (वाइस चेयरमैन), विजय सिंह, डेरियस खंबाटा, भास्कर भट और नेविल टाटा शामिल हैं. 

क्या है मामला?

पिछले साल नवंबर में मेहली मिस्त्री ने टाटा ट्रस्ट्स से ट्रस्टी के तौर पर इस्तीफा दे दिया था. 28 अक्टूबर 2025 को ट्रस्ट में ट्रस्टी के तौर पर तीन साल का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उनकी पुनर्नियुक्ति का प्रस्ताव रखा गया था, लेकिन बोर्ड के तीन सदस्यों- नोएल टाटा, वेणू श्रीनिवासन और विजय सिंह ने इसके खिलाफ वोट दिया था. इसके बाद अपने इस्तीफे पत्र में मिस्त्री ने कहा था कि वह टाटा ट्रस्ट्स की साख को किसी भी सार्वजनिक विवाद में नहीं लाना चाहते हैं.

हालांकि, पद से हटने के बाद उन्होंने महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर को लिखे पत्र में आरोप लगाया कि अक्टूबर 2024 के एक प्रस्ताव के तहत सभी ट्रस्टियों को आजीवन पद पर रहने का अधिकार है. ऐसे में उन्हें हटाया जाना अवैध है. उनके हटने के बाद भास्कर भट और नेविल टाटा की उनकी जगह पर नियुक्ति की गई.

हालांकि, इस महीने की शुरुआत में मिस्त्री ने चैरिटी कमिश्नर के पास एक आपत्ति दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने बाई हीराबाई जमशेदजी टाटा नवसारी चैरिटेबल इंस्टीट्यूशन में ट्रस्टी के तौर पर वेणु श्रीनिवासन और विजय सिंह की मौजूदगी पर सवाल उठाया था. उन्होंने इसका आधार यह बताया था कि वे पारसी नहीं हैं और न ही मुंबई के निवासी हैं, जैसा कि ट्रस्ट डीड में जरूरी है.

क्या चाहते हैं मिस्त्री?

मिस्त्री चाहते हैं कि ट्रस्ट के मौजूदा बोर्ड को हटाकर एक स्वतंत्र प्रशासक को नियुक्त किया जाए, जो निष्पक्ष होकर ट्रस्ट की जांच करें और उसे चलाए. कुछ ट्रस्टियों का यह भी मानना है कि इस अंदरूनी कलह की वजह से ट्रस्ट की छवि खराब हो रही है. ऐसे में सरकार अपनी तरफ से एक या दो निष्पक्ष सदस्यों को बोर्ड में शामिल करें ताकि बोर्ड की बैठकों में पारदर्शिता आए. 

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