अगर आप गांव में रहते हैं और गोबर, पराली या कृषि से निकलने वाले जैविक कचरे से कमाई का जरिया तलाश रहे हैं, तो गोवर्धन योजना आपक काम की हो सकती है. केंद्र सरकार ने GOBARdhan योजना को बढ़ावा देने के लिए 23,731 करोड़ रुपये की नई व्यवस्था जारी की है. इस योजना के तहत CBG प्लांट लगाने वालों को पूंजी सहायता, गैस की खरीद और कीमत से जुड़े सपोर्ट मिलेंगे.
इस योजना का खास मकसद यह है कि गोबर, कृषि अवशेष और दूसरे जैविक कचरे को सिर्फ कचरा मानने के बजाय उससे बायोगैस, CBG और जैविक खाद तैयार करना है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस योजना में क्या बदला है और आम लोगों को इसका क्या फायदा मिल सकता है.
1. CBG प्लांट लगाने पर मिलेगी आर्थिक मदद
नए CBG प्लांट लगाने वालों को परियोजना की क्षमता के आधार पर पूंजी सहायता दी जाएगी. ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट के लिए पात्र क्षमता के हिसाब से 1.25 करोड़ प्रति टन प्रतिदिन (TPD) तक की सहायता का प्रावधान है. एक प्रोजेक्ट के लिए यह सहायता अधिकतम 30 करोड़ तक दी जा सकती है. सिर्फ इतना ही नहीं, बल्कि कुछ मौजूदा प्लांट को अपग्रेद करने पर भी सहायता का प्रवधान है.
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2. तैयार गैस की बिक्री की चिंता कम होगी
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल आता है कि प्लांट लगाने के बाद गैस बिकेगी या नहीं, इसी चिंता को कम करने के लिए योजना में बिक्री के लिए उपलब्ध CBG की 100% तक सुनिश्चित खरीद का ऑप्शन दिया जाता है. इसके लिए CBG को सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन नेटवर्क या चिन्हित CBG क्लस्टर के जरिए मुख्य गैस पाइपलाइन से जोड़ा जा सकता है. इसे खासतौर पर उत्पादकों के लिए बाजार तक पहुंच आसान बनाने की कोशिश की गई है.
3. 10 साल तक कीमत से जुड़ा सपोर्ट
सरकार ने CBG के लिए शुरुआती प्रशासित कीमत 2,110 रुपये प्रति MMBTU का ढांचा तैयार किया है. 95% मीथेन कंटेंट के आधार पर यह कीमत करीब 98 रुपये प्रति किलो के बराबर बैठती है. यह व्यवस्था कम से कम 31 मार्च 2036 तक लागू रहने का प्रावधान है. इसके अलावा खरीदे गए CBG पर प्रति किलो 10 रुपए तक अफोर्डेबिलिटी सपोर्ट दिया जा सकता है.
4. किसानों और ग्रामीण इलाकों में कमाई के मौके
इस योजना का मकसद गोबर, पराली, कृषि अवशेष और दूसरे जैविक कचरे का इस्तेमाल बढ़ाना है. किसान और पशुपालक ऐसे कच्चे माल को CBG प्लांट तक पहुंचा कर अतिरिक्त इनकम का जरिया बना सकते हैं. सरकार का कहना है कि इस प्लांट से जैविक खाद भी तैयार किया जाएगा, ताकि कचरे का इस्तेमाल दोबारा किया जा सके.
5. प्लांट शुरू करने वालों को क्या करना होगा?
- CBG प्रोजेक्ट लगाने के लिए पात्र आवेदकों को निर्धारित प्रोसेस के तहत रजिस्ट्रेशन और परियोजना की तकनीकी जांच करानी होगी.
- जमीन, पानी, बिजली और कच्चे माल की उपलब्धता जैसी चीजों का आकलन किया जाएगा.
- इसके बाद DPR और जरूरी मंजूरियों के आधार पर सहायता दी जाएगी.
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