राज्यसभा में विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर हुए खर्च का ब्योरा संसद को दिया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर 74.58 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुआ है। वहीं, वर्ष 2021 से अब तक उनकी विदेश यात्राओं पर कुल खर्च 550 करोड़ रुपये से अधिक रहा है।
इस साल खर्च हुए इतने करोड़
विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा ने गुरुवार को राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि वर्ष 2026 में जिन यात्राओं का खर्च उपलब्ध है, उनमें मई में हुई प्रधानमंत्री की पांच देशों की यात्रा के दौरान नॉर्वे दौरे पर सबसे अधिक 17.46 करोड़ रुपये खर्च हुए। जून में फ्रांस यात्रा का व्यय अभी संकलित किया जा रहा है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि वर्ष 2026 के कुछ अन्य खर्च अभी अस्थायी (प्रोविजनल) हैं और बिलों के निपटारे के बाद इन्हें अंतिम रूप दिया जाएगा।
आप सांसद संजय सिंह और सीपीआई सांसद वी. शिवदासन के सवाल के लिखित जवाब में विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस साल जुलाई तक प्रधानमंत्री के विदेशी दौरों पर कुल ₹74.59 करोड़ खर्च हुए। जिन देशों का उन्होंने दौरा किया, उनमें मलयेशिया, इस्राइल, यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे, इटली, फ्रांस, स्लोवाकिया, सेशेल्स, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड शामिल हैं। मंत्रालय के आंकड़ों से पता चला कि मई के दूसरे हिस्से में नॉर्वे के दौरे पर सबसे अधिक ₹17,46,50,390 खर्च हुए। इसके बाद फरवरी में प्रधानमंत्री के इस्राइल दौरे पर ₹11,92,25,938 खर्च हुए। उन्होंने इस साल अब तक 13 देशों का दौरा किया है।
जानें पिछले वर्षों का हिसाब
विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर वर्ष 2025 में 180 करोड़ रुपये से अधिक, वर्ष 2024 में 109 करोड़ रुपये, वर्ष 2023 में 93 करोड़ रुपये, वर्ष 2022 में 55 करोड़ रुपये और वर्ष 2021 में 36 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हुआ। मंत्रालय ने कहा कि प्रधानमंत्री के उच्चस्तरीय विदेशी दौरे भारत के द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक संबंधों को मजबूत करने का एक स्थापित माध्यम हैं। इन यात्राओं के जरिए प्रौद्योगिकी, व्यापार एवं निवेश, रक्षा, ऊर्जा और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा दिया जाता है।
विदेश मंत्रालय ने राज्यसभा को यह भी बताया कि जुलाई 2021 से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं के दौरान 316 समझौता ज्ञापनों (एमओयू) और समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। ये रक्षा, व्यापार एवं निवेश, डिजिटल प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा, स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, अंतरिक्ष सहयोग, गतिशीलता एवं प्रवासन, जलवायु कार्रवाई और सांस्कृतिक आदान-प्रदान सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े हैं। मंत्रालय के अनुसार, इन समझौतों का उद्देश्य एशिया, यूरोप, अफ्रीका, मध्य पूर्व, ओशिनिया और अमेरिका के देशों के साथ भारत की द्विपक्षीय साझेदारी को मजबूत करना और सहयोग का विस्तार करना है।

