अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म होने की उम्मीद जगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही फिर शुरू हो गई है। यह हलचल दोनों देशों के बीच शांति समझौते की घोषणा के बाद दिखी है। अमेरिका और ईरान आगामी शुक्रवार को एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करेंगे। इससे अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच जारी युद्ध रुक जाएगा। हालांकि, अमेरिकी सेना ने साफ किया है कि शुक्रवार को आधिकारिक दस्तखत होने तक ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी पूरी तरह जारी रहेगी।
ओमान के रास्ते निकले तेल के जहाज, सेना अलर्ट
राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर इस बदलाव की जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि तेल से लदे कई जहाज होर्मुज जलमार्ग से बाहर निकल रहे हैं। ये जहाज ओमान के समुद्री क्षेत्र वाले ‘साउदर्न हाईवे’ से जा रहे हैं। ट्रंप ने इस रास्ते को सुरक्षित और बेहतरीन बताया है।
दूसरी ओर, अमेरिकी सैन्य सलाहकारों ने जहाजों को सख्त निर्देश दिए हैं। रॉयटर्स के अनुसार, सेना ने कहा है कि जब तक नया आदेश न मिले, कोई जहाज नाकेबंदी पार न करे। इस शुरुआती समझौते में सिर्फ रास्ता खोलने और नाकेबंदी हटाने पर सहमति बनी है। परमाणु कार्यक्रम और प्रतिबंधों जैसे कड़े मुद्दों पर अगले 60 दिनों तक अलग से बातचीत होगी।
बारूदी सुरंगों का खतरा,फंसे हैं 500 जहाज
वैश्विक तेल बाजारों में इस खबर से सुधार देखा गया है। लेकिन इस मुख्य जलमार्ग को पूरी तरह सामान्य होने में अभी महीनों का समय लगेगा। समुद्री सुरक्षा एजेंसियों ने रॉयटर्स को बताया कि पानी में बिछी बारूदी सुरंगों को हटाना बड़ी चुनौती है। इन्हें साफ करने में 40 से 50 दिन लग सकते हैं। इसके बाद ही बीमा कंपनियां जहाजों को सुरक्षा की गारंटी देंगी।
इंटरनेशनल चैंबर ऑफ शिपिंग के अनुसार, इस रास्ते पर करीब 500 जहाज फंसे हुए हैं। इन पर 20,000 कर्मचारी भी फंसे हैं। संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) ने इस युद्ध के दौरान जहाजों पर 46 हमलों की पुष्टि की है। ट्रंप इस हफ्ते फ्रांस में होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में भी बारूदी सुरंगें हटाने पर चर्चा करेंगे।
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टोल टैक्स पर फंसा पेच, बातचीत अभी बाकी
इस जलमार्ग के भविष्य को लेकर अभी कई बड़े सवाल बाकी हैं। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि वे इस रास्ते को हमेशा के लिए टोल-फ्री रखना चाहते हैं। उन्होंने बताया कि इस समझौते पर रविवार को ही डिजिटल हस्ताक्षर हो चुके हैं, इसलिए अब शर्तें नहीं बदलेंगी।
वहीं, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने अलग संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा कि जहाजों से शुल्क लिया जाएगा। ईरान इस रास्ते पर अपना नियंत्रण रखना चाहता है। यह युद्ध इसी साल 28 फरवरी को शुरू हुआ था, जिससे पहले यह मार्ग पूरी तरह खुला था। अब देखना होगा कि दोनों देश टोल टैक्स के विवाद को कैसे सुलझाते हैं।

