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होर्मुज नाकेबंदी के बाद ट्रंप की ईरान पर ‘साइलेंट स्ट्राइक’, बिना बम और मिसाइल हमलों के 2,800 करोड़ रुपये का नुकसान

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एक तरफ मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष और युद्ध को खत्म करने के लिए पाकिस्तान की मेजबानी में इस्लामाबाद शांति वार्ता चल रही है, जबकि दूसरी ओर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करने के लिए लगातार कार्रवाइयों को अंजाम दे रहे हैं. इसी दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिका ने ईरान से जुड़ी 344 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 2,800 करोड़ भारतीय रुपये) की क्रिप्टोकरेंसी को फ्रीज कर दिया है. माना जा रहा है कि ये फंड ईरानी नेटवर्क से जुड़े हुए थे.

अमेरिका की तरफ से यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब पश्चिम एशिया में तनाव जारी है और संघर्ष खत्म करने की कोशिशों में कोई खास प्रगति नहीं हो रही है. विश्लेषकों का कहना है कि यह वाशिंगटन की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत बिना सीधे सैन्य कार्रवाई के ईरान को आर्थिक रूप से कमजोर करने की कोशिश की जा रही है.

ईरान के फाइनेंशियल नेटवर्क पर अमेरिका का हमला

CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी (वित्त मंत्री) स्कॉट बेसेंट ने कहा कि वाशिंगटन उन सभी आर्थिक रास्तों को निशाना बनाएगा, जिनका इस्तेमाल ईरान विदेशों में पैसा भेजने के लिए करता है. उन्होंने कहा, ‘हम ईरानी शासन का समर्थन करने वाले हर आर्थिक रास्ते को बंद कर देंगे.’ अमेरिकी वित्त मंत्री के इस बयान से यह संकेत मिलता है कि अब पारंपरिक सैन्य टकराव के बजाय आर्थिक युद्ध पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है.

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क्रिप्टोकरेंसी को क्यों बनाया गया निशाना?

अमेरिका की तरफ से की गई यह कार्रवाई तब सामने आई, जब टेदर (Tether) ने पुष्टि की कि उसने दो डिजिटल वॉलेट में रखी 344 मिलियन डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी फ्रीज कर दी है. कंपनी के मुताबिक, खुफिया जानकारी से यह संकेत मिले की इन फंड्स का इस्तेमाल अवैध गतिविधियों से जुड़ा हो सकता है, ऐसे में यह कदम अमेरिकी अधिकारियों के साथ समन्वय में उठाया गया है.

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि ब्लॉकचेन एनालिसिस से इन वॉलेट्स का संबंध ईरानी नेटवर्क से जुड़ा पाया गया. जांचकर्ताओं ने यह भी संकेत दिया कि कुछ लेनदेन सेंट्रल बैंक ऑफ ईरान से जुड़े डिजिटल वॉलेट्स से संबंधित हो सकते हैं.

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